*अयोध्या-नेपाल रिश्तों पर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामकृष्ण आचार्य महाराज की विशेष टिप्पणी**सुरेश कुमार कनौजिया के पाटन मंडल गोंडा उत्तर प्रदेश*



सुरेश कुमार कनौजिया देवी पाटन मंडल गोंडा उत्तर प्रदेश

महेन्द्र कुमार उपाध्याय 
अयोध्या धाम। नेपाल से अयोध्या पहुंचे जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामकृष्ण आचार्य जी महाराज ने राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री नित्य गोपाल दास जी महाराज के जन्मोत्सव के अवसर पर  विशेष बातचीत की।  इस संवाद में उन्होंने अयोध्या और नेपाल के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों पर प्रकाश डाला। अयोध्या-नेपाल के गहरे आध्यात्मिक संबंध । स्वामी श्रीरामकृष्ण आचार्य महाराज ने बताया कि अयोध्या और नेपाल के बीच सनातन परंपरा से गहरे संबंध हैं।  यह संबंध केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भी हैं।  नेपाल के जनकपुर को माता सीता का जन्मस्थान माना जाता है, और अयोध्या को भगवान श्रीराम का जन्मस्थान।  दोनों स्थानों के बीच ऐतिहासिक और धार्मिक संबंधों को देखते हुए, दोनों देशों ने रामायण सर्किट के तहत आपसी सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं।  इसमें अयोध्या और जनकपुर के बीच 'सिस्टर सिटी' संबंध स्थापित करने की योजना भी शामिल है।  इसके अतिरिक्त, अयोध्या और जनकपुर के बीच राम-जानकी  मार्ग का निर्माण कार्य भी चल रहा है, जिससे दोनों शहरों के बीच यात्रा सुगम होगी।  मथुरा और काशी विवाद पर भविष्यवाणी। बातचीत के दौरान, स्वामी श्री रामकृष्ण आचार्य  महाराज ने मथुरा और काशी के विवादित स्थलों पर भी अपनी भविष्यवाणी व्यक्त की।  उन्होंने कहा कि आने वाले तीन वर्षों में इन दोनों स्थानों के विवादों का समाधान हो जाएगा, जैसा कि अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण संभव हुआ।  उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मथुरा और काशी की स्थिति भी शीघ्र स्पष्ट होगी। 
पशुपतिनाथ मंदिर और नेपाल-भारत धार्मिक संबंध। स्वामी जी ने नेपाल स्थित विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मंदिर भारत-नेपाल धार्मिक संबंधों का प्रतीक है।  उन्होंने यह भी कहा कि पशुपतिनाथ से जुड़े कई गूढ़ रहस्य आज भी अनछुए हैं, जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है।  इस विशेष बातचीत में स्वामी श्री रामकृष्ण आचार्य  महाराज ने अयोध्या और नेपाल के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।  उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों के बीच सहयोग और समझ से धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण और संवर्धन संभव होगा।

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