*गोण्डा कायस्थ फाउंडेशन की बैठक में कायस्थों के उत्थान पर हुई चर्चा**सुरेश कुमार कनौजिया देवीपाटन मंडल गोण्डा उत्तर प्रदेश*
सुरेश कुमार कनौजिया देवीपाटन मंडल गोण्डा उत्तर प्रदेश
गोंडा, कायस्थ फाउंडेशन की एक अहम बैठक फाउंडेशन के महासचिव के आवास पर हुई जिसमें बहुत सारे कायस्थ समाज के उत्थान पर चर्चा हुई। फाउंडेशन के अध्यक्ष विनोद कुमार श्रीवास्तव ने बताया की हमारा फाउंडेशन कायस्थों के हितों पर काम करेगा। कायस्थ समाज के जो गरीब तबके के लोग हैं फाउंडेशन उनकी हर सम्भव मदद करेगा। महासचिव कमलेश कुमार ने बताया कि फाउंडेशन मे कायस्थ समाज के ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ा जाएगा । बैठक में समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर उपस्थित सदस्यों द्वारा चर्चा की गई। इसके साथ ही देश के दूसरे प्रधान मंत्री श्री शास्त्री जी के जन्मदिन पर समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रमों पर विशेष चर्चा करते हुए रूपरेखा बनाई गई।बैठक में कोषाध्यक्ष विकास मनोहर ने समाज में आपसी मतभेद को लेकर कहा कि, नौकरियों के साथ ही अब कायस्थ समाज का देश की राजनीति में प्रतिनिधित्व कम होता जा रहा है. हम बुद्विजीवी कौम है और यही कारण है कि आपसी प्रेम और सहयोग तो है हम में लेकिन मतभेद बने रहते है. अब जरूरत है कि देश का कायस्थ समाज एक हो और आन्तरिक संगठन मजबूत हो जिससे हम राजनीति में अपना प्रतिनिधित्व हासिल कर पाएं। सह कोषाध्यक्ष विजित प्रेम श्री वास्तव ने कहा कि फाउंडेशन शुरूआती दौर में कुछ ऐसे समाजिक मुद्दों की पहचान करें जो सबकी जरूरत के हों (जैसे स्वस्थ्य, शिक्षा, रोजगार व परिवारिक संबंध आदि) जिससे अधिक से अधिक चित्रांश बंधु प्रभावित हो और समाज को ज्यादा सहयोग मिलने की अधिक सम्भावना हो। एक कार्य की सफलता के बाद दूसरे कार्य का रास्ता आसान हो जाता है। अतः कार्य पूरा हो जाने के बाद चित्रांश बंधुओं को समाज की संगठन शक्तियों का अहसास हो।
सचिव दीपक कुमार श्री वास्तव ने कहा कि
कायस्थ फाउंडेशन छोटी-छोटी सभाएँ करके अपने समाज की जरूरतों को पहचानें उसके निदान के उपाय खोजे और तय करे कि अपनी तरफ से अपने समाज की जरूरतों को पूरा करने के लिए हमारा क्या सहयोग होगा। फाउंडेशन को सक्रिय करने के लिए पहले ज्यादा से ज्यादा चित्राश बंधुओं से व्यक्तिगत रूप से मिलना अति आवश्यक होगा। जिससे सामाजिक विचारधारा को जानकर कार्य को योजनानुसार सफल बनाया जा सके। विकास श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान में चित्रांश बंधुओं की मानसिकता कायस्थ समाज की गतिविधियों या आयोजनों में भाग लेने की नहीं रही है। इसलिए अपने कार्यक्रमों को उनके विचारों को दृष्टिगत करें जिससे जन साधारण की रुचि बनी रहें और वह समाज की गतिविधियों के प्रति उत्सुक हो सजग रहें।
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