*सामाजिक न्याय के मसीहा कर्पूरी ठाकुर**ब्यूरो चीफ मंड़ल सुरेश कुमार कनौजिया/संवाददाता शिव कुमार कनौजिया गोंडा*



ब्यूरो चीफ मंड़ल सुरेश कुमार कनौजिया/संवाददाता शिव कुमार कनौजिया गोंडा

गोंडा।24जनवरी। *सामाजिक न्याय के मसीहा थे कर्पूरी ठाकुर। सादगी,ईमानदारी और त्याग की बेमिसाल उदाहरण थे कर्पूरी ठाकुर। सादा जीवन उच्च विचार,मानवता का यह आधार। कर्पूरी ठाकुर के जीवन की पहचान थी। उनका सम्पूर्ण जीवन-संघर्ष मानववाद के लिए नसीहत और प्रेरणादायक है। निरीह और लाचार समाज के कर्मवीर थे और उनके लिए जोश, जज्बा और जुनून थे कर्पूरी ठाकुर। उन्होंने सामाजिक अव्यवस्था खत्म करने के लिए आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने मुख्यमंत्री के दूसरे कार्यकाल में मुंगेरीलाल आयोग द्वारा वंचित समाज को 20% आरक्षण मध्य पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग,महिलाओं को 3%,गरीब सवर्ण के लिए 3% लागू किया।* उक्त विचार टाउन हॉल, गांधी पार्क में *नाई समाज कल्याण समिति* द्वारा आयोजित  कर्पूरी ठाकुर जन्म शताब्दी समारोह में मास के राष्ट्रीय संगठक ए.के.नन्द ने व्यक्त किया। शिवकुमार विश्वकर्मा पूर्व विधायक प्रत्याशी बसपा ने कहा कि उनका नारा था  कि "अधिकार चाहो तो लड़ना सीखो,पग-पग पर अड़ना सीखो,जीना है तो मरना सीखो।" एडवोकेट हाई कोर्ट आनंद कुमार वर्मा ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर कहते थे कि गरीब वह नहीं जो झोपड़ी में रहता है,गरीब वह है जो अपनी दौलत का घमंड झोपड़ी वाले को दिखाता है। मेलाराम ठाकुर प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सामाजिक अपमान गरीबी से अधिक खटकता है।" कर्पूरी ठाकुर का मानना था कि बिना तर्क किये किसी बात को मानना एक प्रकार की गुलामी है। मनोज ठाकुर ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर में धन,पद व प्रतिष्ठा की कत्तई कोई लालसा नहीं थी। अनिल कुमार ने कहा कि वे राजनैतिक मूल्य,नैतिकता,सादगी और सत्य निष्ठा के जीवंत उदाहरण थे।पवन कुमार वर्मा ने कहा कि पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के सशक्तिकरण के लिए वे सार्थक और सफलतापूर्वक कार्य को अंजाम तक पहुँचाते रहे। ओम प्रकाश ने कहा कि उनके फटे कुर्ते-पायजामे और फटा कोट जिसके साथ वे युगोस्लाविया चले गए थे सादगी और दिखने वाली ईमानदारी की पहचान थी।शैलेन्द्र कुमार वर्मा-एडवोकेट ने कहा कि उन्होंने कभी भी पक्षपात,धर्मान्धतापूर्ण,अवैज्ञानिक,अंधविश्वासी,ढोंग-पाखंडी,जाति-पांत क्रियाकलापों में संलिप्त नहीं हुये और न ही किसी को प्रश्रय भी दिया। अंकित ठाकुर ने कहा कि ऐसे महानायक लाखों-लाख में अपवाद बनते हैं। उनकी कथनी और करनी में सदैव एकरूपता पायी गयी। पंकज कुमार ने कहा कि वे जो कहो वही करो और जो करो वही कहो को आजीवन चरितार्थ करते रहे।इसीलिए वे एक महान चरित्र निर्माता भी थे। शिव सागर ने कहा कि उनके बताये रास्ते पर चलकर पुनः मानवता का कल्याण किया जा सकता है। अभिषेक ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने तथागत बुद्ध,अरहत उपालि,सम्राट महापद्मनंद,सम्राट अशोक महान,संत कबीर,संत रविदास,संत गाड्गे,ज्योतिबाराव फूले,शाहू जी महाराज,पेरियार रामासामी और बोधिसत्व डाॅ.अम्बेडकर के विचारों को अपने जीवन का प्रकाश माना और अपने आचरण में आत्मसात किये रहे।अमरेश कुमार ने कहा कि वे गले में माला विचारों पर ताला के कत्तई समर्थक नहीं थे। 100वर्षों बाद भी जिनके व्यक्तित्व और कृतित्व और चरित्र पर संगोष्ठी हो वह वास्तव में महापुरुष,जननायक कहलाने लायक है।कार्यक्रम में राजबहादुर,बजरंगी ठाकुर,संतोष कुमार,बृजेश कुमार नन्द,रमेश प्रसाद नंद,जगन्नाथ शर्मा,विनोद कुमार शर्मा,सुशील,शेषराम वर्मा,हेमंत,विनोद,सुरेश ठाकुर,मुन्ना,तिलक राम शर्मा,सतीश,देवेन्द्र,कुलदीप,जगदम्बा,उदयभान,शिवचरन,राम चन्द्र,चिंता राम,मनोज कुमार,मुन्ना सिंह ठाकुर,सिपाही लाल,अनूप ठाकुर,राघवराम आदि लोगों ने सहभाग किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सालिक राम प्रधान और संचालन आनंद कुमार वर्मा-एडवोकेट हाईकोर्ट ने किया।

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