*गोण्डा 26 नवम्बर भारत का संविधान हमारी आन -बान- शान का प्रतीक हैं**ब्यूरो चीफ मंड़ल सुरेश कुमार कनौजिया/संवाददाता शिव कुमार कनौजिया गोण्डा*




ब्यूरो चीफ मंड़ल सुरेश कुमार कनौजिया/संवाददाता शिव कुमार कनौजिया गोण्डा

गोंडा,26नवम्बर। *भारत का संविधान हमारी आन-बान-शान का प्रतीक है। ऐसा संविधान विश्व का एकमात्र मध्यममार्गी संविधान है जो आपातकाल,युद्ध काल और संक्रमण काल में सदैव कल्याणकारी रहा है। यह एकमात्र ऐसा संविधान है जो जनता के द्वारा,जनता के लिए और जनता का, लोकप्रिय लोकतांत्रिक राष्ट्रीय दस्तावेज है। जो मानव की गरिमा,राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली पंथनिरपेक्ष,सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न,समाजवादी,लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए सामाजिक आर्थिक और राजनैतिक न्याय,विचार,अभिव्यक्ति,विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता,प्रतिष्ठा और अवसर की समानता बढ़ाने के लिए कृतसंकल्पित है।* उक्त विचार पंचसील शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थान बनकटी सूर्यबली सिंह रामनगर में आयोजित संविधान दिवस समारोह में मास के राष्ट्रीय संगठक एवं मास संदेश के सम्पादक ए.के.नन्द ने व्यक्त किया। नंद ने कहा कि भारत का संविधान पूर्णतः बुद्ध,धम्म और संघ के अनुरूप है जो मैत्रीपूर्ण व्यवस्था को साकार करने में सक्षम है। भारत के संविधान ने पुरूष और महिला को बराबर का सम्मान और अधिकार देने का कार्य किया है।बुद्ध वंदना तिसरण और पंचसील ग्रहण कराने का कार्य एकेनन्द ने और  संविधान की प्रस्तावना का संकल्प रामेश्वर पवन जी ने कराया। रामेश्वर पवन एडवोकेट ने कहा कि मानव मूल्यों और मानव अधिकारों से ओत-प्रोत हमारा संविधान है। शारदा प्रसाद चौधरी ने कहा कि हमारा संविधान पूर्णरूपेण मानवतावाद पर आधारित है। पूजाराम सोनकर ने कहा भारत का संविधान समता मूलक समाज की पहचान कायम करता हुआ लोककल्याणकारी संविधान है। विद्या प्रसाद जी ने कहा कि अवैज्ञानिक और ढोंग-पाखंड का नामोनिशान मिटाने वाला वैज्ञानिक अनुसंधान पर आधारित हमारा संविधान है। राम सजन ने कहा कि भारतीय संविधान ने देश को सदैव संकटकाल से मुक्त रखा है। शिवकुमार विश्वकर्मा ने कहा कि भारत का संविधान सम्राट अशोक और शाहूजी महाराज के सपनों को साकार करने वाला,जाति-पांत,धर्म भेद-भाव और लिंग भेद-भाव से मुक्त करने वाला जन-कल्याणकारी संविधान है।कार्यक्रम में ए.के.नन्द जी को अंगवस्त्र और वीरागंना झलकारीबाई के फोटो के साथ सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में हरिप्रसाद गौतम,मीना कुमारी बौद्ध,राज बहादुर,राजकिशोर मौर्य,चन्द्रशेखरविश्वकर्मा,गौरव कुमार नन्द,रामकरन वर्मा-एडवोकेट,गया प्रसाद आनंद,सूबेदार,रत्तीराम,मंशाराम,दीपक,सरिता कश्यप,रवि प्रकाश बौद्ध,धर्मनरायन,घनश्याम मौर्य,रमेश गौतम,राम यश,छोटेलाल,विजय कुमार,राजू,बीपी बौद्ध,सियाराम सरोज,पवन कुमार,अजय भाई कुरील,केसी नन्द,राम अभिलाख मौर्य,लम्बरदार मौर्य,रीना,कुसुम,लता गौतम,अनामिका,निर्मला बौद्ध,बिन्दू बौद्ध,विद्यावती,राजकरन अकेला एडवोकेट,केशरी प्रसाद दरोगा,राम पाल,दयाराम,रतन लाल,कुलदीप सहित हजारों लोगों ने सहभाग किया।संगीत पार्टी ने संविधान पर आधारित गीतों से अभिप्रेरित करने का कार्य किया।

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