*अदम गोंडवी के गांव की सड़क आज भी जर्जर**ब्यूरो चीफ मंड़ल सुरेश कुमार कनौजिया/संवाददाता शिव कुमार कनौजिया गोण्डा**फटे कपड़ों में तन ढांके गुज़रता हो जहां कोई**समझ लेना वो पगडंडी अदम के गांव जाती है*








ब्यूरो चीफ मंड़ल सुरेश कुमार कनौजिया/संवाददाता शिव कुमार कनौजिया गोंडा
परसपुर। जनकवि रामनाथ सिंह उर्फ अदम गोंडवी की ये पंक्तियां देशभर में बहस-मुबाहिसों के दौरान अक्सर गरीबों की हालत बयां करने के लिए दोहराई जाती हैं। ये पक्तियां उनके गांव को जाने वाले रास्ते पर आज भी सटीक बैठ रही हैं।

परसपुर क्षेत्र के ग्राम आंटा के गजराज पुरवा में जनवादी कवि स्वर्गीय रामनाथ सिंह उर्फ अदम गोण्डवी की 76 वीं जयंती पर रविवार

*राम नाथ सिंह उर्फ अदम गोंडवी*

को श्रद्धांजलि सभा में संगोष्ठी व काव्य पाठ का आयोजन किया गया है। इससे देश-प्रदेश की चर्चित चेहरे हिस्सा लेंगे। 22 अक्टूबर 1947 को पूरे गजराज सिंह पुरवा गांव में जन्मे अदम ने अपनी रचनाओं के जरिए मुफलिसों और मजलूमों के दर्द को बयां किया। उन्होंने वर्ष 2007 में गांव जाने वाली पगडंडी पर सड़क बनाने के लिए जब पर सड़क बनाने के लिए जब
परसपुर क्षेत्र में अदम गोंडवी के गांव को जाने वाली जर्जर सड़क। आत्मदाह की चेतावनी दी तब तत्कालीन डीएम मुक्तेश मोहन मिश्रा गांव पहुंचे और सड़क निमार्ण के लिए निर्देशित किया। लेकिन अफसोस है कि आज उनके गांव की अफसोस है कि आज उनके गांव की सड़क की हालत फिर बदतर है। अदब की दुनिया की शख्सियत ने अपने परिवार के ऐशो-आराम के
साधन नहीं जुटाए। नतीजतन उनके निधन के बाद गिरवी रखे खेत को जिले के तत्कालीन डीएम रामबहादुर के सहयोग से छुड़ाया जा सका था। खतरनाक कवि के नाम से पहचान बनाने वाले भतीजे दिलीप सिंह उनकी स्मृति सृजन की विरासत को संजो रहे हैं।

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