*योगी जी ई-श्रमपर ध्यान दे तभी ई-श्रम का मतलब होगा* *ब्यूरो चीफ मंड़ल सुरेश कुमार कनौजिया गोंडा*


ब्यूरो चीफ मंड़ल सुरेश कुमार कनौजिया गोंडा

ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत मजदूरों को आयुष्मान कार्ड, आवास, पेंशन, बीमा, पुत्री विवाह अनुदान,
मुफ्त शिक्षा व कौशल विकास प्रशिक्षण देना सुनिश्चित किया जाए।
ऽ प्रदेश में तत्काल वेज रिवीजन कर न्यूनतम मजदूरी 26000 रुपए की जाए।
ऽ निर्माण मजदूरों के पेंशन की गारंटी की जाए और उनकी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
ऽ घरेलू कामगार और गिग वर्कर्स के लिए केंद्रीय कानून बनाया जाए।
ऽ रोजगार अधिकार गारंटी कानून बनाकर हर व्यस्क नागरिक को न्यूनतम मजदूरी पर साल भर रोजगार दिया जाए।

असंगठित मजदूरों के साझा मंच का
राज्य स्तरीय प्रतिनिधि सम्मेलन
दिनांक व समय - 12 अक्टूबर 2023, 11 बजे से  स्थान- उपश्रमायुक्त कार्यालय, एपी सेन रोड, लखनऊ।

प्रिय मित्रों,
         देश का संविधान हर नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार देता है। संविधान स्पष्ट रूप से कहता है कि इसके लिए योजनाएं व कानून बनाना सरकार का दायित्व है। बावजूद इसके सरकारें हम मजदूरों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कानून और योजनाएं नहीं बनाती और जो बनी हुई है उन्हें लागू नहीं करती। आप उत्तर प्रदेश को ही देख ले यहां ई-श्रम पोर्टल पर 8 करोड़ 30 लाख मजदूर पंजीकृत किए गए। इन असंगठित मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा के लिए देश की संसद द्वारा 2008 में कानून भी बनाया गया था और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस संबंध में आदेश दिए हैं। बावजूद इसके इन मजदूरों के लिए किसी भी योजना की घोषणा सरकार ने नहीं की। हालत यह है कि प्रदेश में पिछले 5 सालों से न्यूनतम मजदूरी का वेज रिवीजन ना होने के कारण प्रदेश की मजदूरी दर बेहद कम है और इस महंगाई में मजदूरों को अपने परिवार का भरण पोषण करना कठिन होता जा रहा है। आंगनवाड़ी, आशा और मिड डे मील रसोईया जैसे स्कीम वर्कर्स को तो मनरेगा से भी कम मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है। निर्माण मजदूरों के लिए जो योजनाएं चल रही थी उनमें से ज्यादातर योजनाओं को बंद कर दिया गया यहां तक कि उनकी पेंशन को भी खत्म कर दिया गया। घरेलू कामगार के लिए कानून बनाने को सरकार तैयार नहीं है। इंटरनेट की दुनिया में पैदा हुए जोमैटो, ओला, उबर जैसे गिग वर्करों के लिए कोई कायदा कानून नहीं है। बड़े पैमाने पर अपनी आजीविका चलाने के लिए मजदूरों ने ई-रिक्शा खरीदा अब सरकार तमाम रूटों पर उसे चलाने पर ही रोक लगा रही है। प्राइवेट चालक, कुली, पल्लेदार, रिक्शा वाले, चिकनकारी का काम करने वाले मजदूरों को तो कोई पूछने वाला नहीं है। उल्टा सरकार काम के घंटा 12 करने पर आमादा है और मजदूरों को आधुनिक गुलामी में धकेल देना चाहती है। आप भूले नहीं होंगे कि देश में दो करोड़ रोजगार हर साल देने का वादा किया गया था। लेकिन अब हालत यह है कि रोजगार लगातार घट रहा है।
          मित्रों देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर देश के एक प्रतिशत बड़े पूंजीपतियों पर मात्र दो प्रतिशत संपत्ति टैक्स और 33 प्रतिशत उत्तराधिकार टैक्स लगा दिया जाए तो हिंदुस्तान के हर नागरिक को मुफ्त गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के अधिकार, भोजन के अधिकार और पेंशन के अधिकार की कानूनी गारंटी दी जा सकती है। लेकिन कॉर्पोरेट यानी बड़े पूंजीपतियों के लिए काम करने वाली सरकारें इसे करने को कतई तैयार नहीं है।
        ऐसी स्थिति में प्रदेश के 100 से ज्यादा संगठनों ने मिलकर साझा मंच का निर्माण किया है। ताकि मजदूरों के बेहतर जीवन के लिए सरकारों को मजबूर किया जाए। इस साझा मंच की तरफ से आगामी 12 अक्टूबर को लखनऊ उपश्रमायुक्त कार्यालय एपी सेन रोड पर प्रतिनिधि सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। आपसे निवेदन है कि इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में शामिल हो और तन-मन-धन से सहयोग करें। ताकि आगामी आंदोलन की रणनीति को तय किया जा सके।

चंद्रशेखर, कोआर्डिनेटर, साझा मंच, 7 बी. एन. रोड़, कैसरबाग, लखनऊ द्वारा जारी। सम्पर्क मोबाइल नम्बर 9451945815, 9236129724, 9450153307।

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