*गोंडा कलेक्ट्रेट परिसर में असंगठित मजदूर द्वारा धरना प्रदर्शन करके सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौपा**ब्यूरो चीफ मंड़ल सुरेश कुमार कनौजिया/संवाददाता शिव कुमार कनौजिया गोंडा*




 
ब्यूरो चीफ मंडल सुरेश कुमार कनौजिया/शिव कुमार कनौजिया गोंडा

गोंडा असगठित मजदूरों का साझा मंच के प्रान्तीय आवाहन पर मुख्यमन्त्री जी को सम्बोधित 13 सूत्रीय मांग पत्र प्रतिनिधि मण्डल के साथ सिटी मजिस्ट्रेट गोण्डा के माध्यम से मुख्यमन्त्री जी को प्रेषित किया गया है।

प्रतिनिधि मण्डल में असगठित क्षेत्र के संगठनों के पदाधिकारी सत्य नरायन त्रिपाठी, सुरेश कुमार कनौजिया, बजरंगी पाण्डेय, मंयकर तिवारी, पिन्टू भारती, राजू, सुनील आदि थे।
1. ई श्रम पोर्टल पर पंजीकृत श्रमिकों के लिए योजनाएं ई श्रम पोर्टल पर जितने भी मजदूर पंजीकृत हैं उन्हें लाभार्थी की श्रेणी में शामिल किया जाए और सरकार की हर योजना का लाभ दिया जाए। उन्हें प्रमुख रूप से 5 लाख तक मुफ्त इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड, आवास योजना, 5000 रूपये पेंशन की गारंटी, मजदूरों के बच्चों को शिक्षा अधिकार कानून के तहत मुफ्त शिक्षा की गारंटी, छात्रवृत्ति, मृत्यु होने पर 5 लाख का बीमा और दुर्घटना पर 2 लाख का बीमा, अंत्येष्टि लाभ, कामकाजी महिलाओं के 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए शिशु पालना गृह और मजदूरों की बेटियों के विवाह के लिए सरकारी सहायता दी जाए। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के व्यय भार के लिए सामाजिक सुरक्षा कोष निर्मित किया जाए, जिसमें राज्य सरकार जीडीपी का 2 प्रतिशत अनुदान दे। मौजूदा सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन 06.08.2018 को हुआ था। यह अवधि लगभग 5 वर्ष की होने जा रही है। असंगठित मजदूर सामाजिक सुरक्षा कानून की धारा 3 में बोर्ड के कार्यकाल का 3 वर्ष का प्रावधान है। अतः बोर्ड का पुर्नगठन किया जाए और नियमावली की धारा (1) (क) के अनुसार श्रमिक पक्ष से 7 सदस्यों में असंगठित कामगारों के मान्यता प्राप्त फेडरेशन, केन्द्रीय ट्रेड यूनियन्स से फेडरेशन से बोर्ड में प्रतिनिधि लिए जाए।

न्यूनतम मजदूरी का वेज रिवीजन अभी हाल ही में हुए विधानसभा सत्र में श्रम मंत्री द्वारा अगले 6 माह में वेज बोर्ड के गठन की बात औचित्यहीन है। क्योंकि प्रदेश में 2019 से वेज रिवीजन

2. लम्बित है अतः तत्काल न्यूनतम मजदूरी का वेज रिवीजन किया जाए और इसके लिए वेज बोर्ड का गठन किया जाए। अवगत कराना है कि प्रदेश में निर्माण मजदूरों के बोर्ड द्वारा

3. निर्माण मजदूरों के सम्बंध में सुरक्षा के योजनाओं के लाभ से लेकर पंजीकरण, नवीनीकरण की प्रक्रिया को जटिल बना दिया गया है इसलिए इन जटिल प्रक्रियाओं को समाप्त किया जाए। निर्माण मजदूरों की सामाजिक लिए नई योजनाएं चालू की जाए और पुरानी चल रही योजनाओं को पूरी क्षमता से चलाया जाए। निर्माण मजदूरों को बोर्ड से 5000 रूपये पेंशन दी जाए।

4. घरेलू कामगार के सम्बंध में - घरेलू कामगार के लिए कानून व बोर्ड का गठन तत्काल किया जाए। उनकी घंटे व काम के अनुसार न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण किया जाए। 5. प्रदेश में वन डिस्ट्रिक वन प्रोजेक्ट की बड़ी चर्चा हो रही है लेकिन इन उद्योगों विशेषकर बुनकर, चिकनकारी, जरदोजी आदि में काम करने वाले मजदूरों की बड़ी बुरी हालत है। इनके सामाजिक सुरक्षा लिए योजनाएं चलाई जाए और बुनकरों के 72 रूपये प्रति लूम फ्लैट रेट पर बिजली

देने के पूर्ववर्ती आदेश को बहाल किया जाए।

6. गिग व प्लेटफार्म वर्कर के लिए राजस्थान सरकार द्वारा कानून की तरह प्रदेश में भी कानून

बनाया जाए और उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाए। 7. स्कीम वर्कर्स के सम्बंध में 62 साल में रिटायर की जा रही आंगनवाडियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाए और उन्हें सवैतनिक अवकाश व पेंशन दी जाए। साथ ही चुनावी वायदे के अनुसार उनके मानदेय में बढ़ोत्तरी की जाए। मिड डे वर्करों को हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार न्यूनतम मजदूरी दी जाए और एरियर का भुगतान किया जाए। आशाओं के मानदेय और इलाज कराने पर मिल रहे कमीशन में बढ़ोत्तरी की जाए। B. कोरोना काल में बनाए गए उत्तर प्रदेश प्रवासी श्रमिक आयोग को सक्रिय किया और

अंतराष्ट्रीय व अंतर राजकीय प्रवासी श्रमिकों के पंजीकरण की व्यवस्था की जाए और उनके साथ हो रही विधि विरुद्ध कार्यवाहियों पर रोक लगाई जाए।

9. ई रिक्शा चालको व प्राइवेट वाहन चालकों पर आए दिन हो रहे पुलिस दगन पर रोक लगाई जाए और बार-बार कुछ सड़को पर उनका संचालन प्रतिबंधित करने के तुगलकी फरमान वापस लिए जाए।

10. प्रदेश में बढ़ रही बेरोजगारी के हल के लिए रोजगार गारंटी कानून बनाया जाए और मजदूर के निवास से 25 किलोमीटर की दूरी के अंदर सरकार द्वारा सालभर न्यूनतम मजदूरी पर रोजगार दिया जाए. साथ ही रोजगार न देने की स्थिति में न्यूनतम मजदूरी के आधे की दर से बेकारी भत्ता दिया जाए। मनरेगा को मजबूत कर रोजगार व समयबद्ध मजदूरी भुगतान सुनिश्चित किया जाए। स्थाई कामों में ठेका / संविदा प्रथा समाप्त की जाए और अभी कार्यरत श्रमिकों को नियमित

किया जाए।

11. प्राकृतिक स्रोत्रों पर निर्भर समुदायों विशेषकर आदिवासियों के वन उपज और जल, जंगल, जमीन पर अधिकार सुनिश्चित किए जाए।

12. पटरी दुकानदारों के लिए बने केन्द्रीय कानून को लागू किया जाए और बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें उजाड़ना बंद किया जाए। 13. किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) कानून बनाया जाए और प्रदेश के एक बड़े भाग में पढ़ सूखे को देखते हुए किसानों को तत्काल मुआवजा दिया जाए।

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