*आत्मचिंतन स्वयं को परखने की प्रक्रिया है - रविशंकर**गंगा आरती में श्रद्धालु झूमे**ब्यूरो चीफ मंडल सुरेश कुमार कनौजिया/प्रमुख संवाददाता खुशबू कनौजिया गोंडा*
ब्यूरो चीफ मंडल सुरेश कुमार कनौजिया/संवाददाता शिव कुमार कनौजिया गोंडा
गोंडा “मनुष्य जितना अधिक आत्मचिंतन से सीख सकता है, उतना किसी बाहरी स्रोत से नहीं,,आत्मचिंतन स्वयं को परखने की प्रक्रिया हैं ये बातें कथा में रविशंकर गुरूवर ने कहा
सवा लाख पार्थिव पूजन एवं श्री शिव महापुराण कथा के षष्टम दिवस की कथा में पूज्य महाराज जी के द्वारा भक्तों को ज्योतिर्लिंगों की कथा के साथ गंगा अवतरण की कथा सुनाई गई,,कथा की महिमा और भजनों की श्रृंखला में उपस्थित सभी भक्त झूम उठे,,भक्तों के द्वारा भगवान भोलेनाथ को छप्पन भोग लगाया गया,,माँ गंगा के अवतरण की कथा का विस्तार करते हुए व्यास पीठ से गुरुदेव ने बताया कि, जब माँगंगा स्वर्ग से अपार वेग के साथ नीचे आईं तो शिव की जटाओं में क़ैद हो गईं। भगीरथ की विनती पर शिव ने गंगा को एक पतली धारा के रूप में जटाओं से निकाला।
गंगावतरण से तात्पर्य है कि 'गंगा का पृथ्वी पर अवतरण'। अयोध्या के इक्ष्वाकु वंशीय राजा भगीरथ के कठिन प्रयत्नों और घोर तपस्या से ही गंगा का पृथ्वी पर अवतरण सम्भव हुआ था। भगीरथ के पूर्वज राजा सगर के साठ हज़ार पुत्र कपिल मुनि के तेज से भस्म हो जाने के कारण अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए थे। उनके भस्म हो जाने से उस स्थान पर साठ हज़ार राख की ढेरियाँ लग गईं। अपने पूर्वजों की शांति के लिए ही भगीरथ ने घोर तप किया और गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने में सफल हुए। पूर्वजों की भस्म के गंगा के पवित्र जल में डूबते ही वे सब शांति को प्राप्त हुए। कार्यक्रम के दौरान म मुख्य यजमान आरती- सोनी संतोष सोनी के अलावा कार्यक्रम के अध्यक्ष संदीप मल्होत्रा, रवि सोनी, शिव शंकर सोनी, विशाल बंसल, आशीष मिश्रा, नारायण भावसिंहका,पप्पू प्रजापति, दीपेंद्र मिश्रा, रामशंकर कसौधन, अंबिका कसौधन, भाजपा महिला मोर्चा की क्षेत्रीय अध्यक्ष वंदना गुप्ता, ममता सोनी, रंजना सोनी, माया देवी, कनक लता देवी सहित भारी संख्या में भक्त मौजूद रही।
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