*किसानो पर कहर ढारही हैं नोएडा के विकास की योजनायें**डबल इंजिन की सरकार कुछ भी सुनने को तैयार नहीं**ईद नियमानुसार मुआबजा देने में अटकाये जारहे हैं रोड़े डा॰ गिरीश**ब्यूरो चीफ मंडल सुरेश कुमार कनौजिया गोंडा उत्तर प्रदेश*
ब्यूरो चीफ मंडल सुरेश कुमार कनौजिया गोंडा उत्तर प्रदेश
ग्रेटर नोएडा/ लखनऊ- 24 अप्रैल, 2023, ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण किसानों को वर्षों से जबरिया लूट रहा है। इससे वहाँ के किसान बेहद नाराज़ हैं। अपनी ज़मीनों के कानूनसम्मत मुआबजे के लिये वे हर मुमकिन तरीके से संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन डबल इंजन की सरकारें उनकी कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं है। वे अपने ही बनाए कानून को लागू करने से मुकर रही हैं। ये किसानों के साथ बड़ा छल है।
लंबे समय से किसान अपने हित में सही फैसले का इंतज़ार कर रहे थे। मगर शुक्रवार को हुई बोर्ड बैठक में मुआवजे के रेट्स में मामूली वृद्धि की गई है।
नए भूमि अधिग्रहण कानून को लागू हुए 9 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने नए कानून के लागू होने के बाद वर्ष 2014 में मुआवजा वृद्धि की थी। जिस समय नया कानून लागू हुआ था, उस वक्त 1560 रूपए प्रति वर्ग मीटर मुआवजा दर थी। नए कानून के अनुसार प्राधिकरण को सर्किल रेट का 4 गुना मुआवजा देना चाहिए था। वर्तमान में इस कानून के अनुसार मुआवज़ा दर कम से कम 24 हज़ार रुपये प्रति वर्ग मीटर होनी चाहिए।
*यह है फार्मूला*
जब नया भूमि अधिग्रहण क़ानून लागू हुआ तो सर्किल रेट और प्राधिकरण की मुआवज़ा दर लगभग बराबर थीं, जो 1560 रूपए थीं। क़ानून में कहा गया है कि ग्रामीण इलाक़ों में सर्किल रेट से चार गुणा मुआवज़ा दिया जाएगा। लिहाज़ा, तब अथॉरिटी को मुआवज़ा दर 6200 रुपये प्रति वर्ग मीटर घोषित करनी थी। परंतु प्राधिकरण ने किसानों के साथ छल करते हुए मुआवजा राशि में मात्र 940 रूपए की वृद्धि करके 2500 प्रति वर्ग मीटर किया था। इस तरह मुआवजा वृद्धि जहां चार गुना होनी थी, वहां दोगुना से भी कम हुई। इतना ही नहीं, प्राधिकरण ने नोटिफाइड 202 गांवों में ग्राम पंचायत खत्म करवा दीं। जिससे गांवों को शहर घोषित करने में क़ानूनी अड़चन ना आए और प्राधिकरण को सर्किल रेट का 2 गुना मुआवजा ही देना पड़े। प्राधिकरण ने साजिश करते हुए पिछले 9 वर्षों में गांवों की जमीनों के सर्किल रेट नहीं बढ़ने दिए हैं।
*किसानों ने धोखे का आरोप लगाया*
किसान आरोप लगा रहे हैं कि अथॉरिटी ने हमारे साथ हमेशा धोखा किया है। किसान को सर्किल रेट से 2 या 4 गुना तो छोड़िए बाजार भाव से भी वंचित कर दिया गया। क्षेत्र के गांवों में कॉलोनाइजर 6000 से लेकर 15000 प्रति वर्ग मीटर की दर से जमीनों की खरीद कर रहे हैं। इस तरह बाजार भाव 6000 से कम नहीं है। नए कानून के अनुसार गांवों में 4 गुना मुआवजा 24000 रुपये प्रति वर्ग मीटर होता है। जिसकी मांग किसान लंबे समय से कर रहे हैं। उन्होने 24 मार्च को धरना- प्रदर्शन के बाद मुख्य कार्यपालक अधिकारी से बातचीत की। बातचीत में सीईओ रितु माहेश्वरी ने पर्याप्त मुआवजा वृद्धि करने का वादा किया था, परंतु शुक्रवार को हुई 129वीं बोर्ड- बैठक में मुआवजे में मात्र 375 रुपये की हास्यास्पद वृद्धि करके किसानों का मजाक उड़ाया गया है। जबकि प्राधिकरण ने इसी दौरान अपनी आवासीय, संस्थागत और औद्योगिक भूखंडों की आवंटन दरों में बेतहाशा वृद्धि कर ली है।यहां उल्लेखनीय है कि प्राधिकरण ग्राम कैलाशपुर, खेड़ी भनौता, सुनपुरा और अन्य गांवों के किसानों से अत्यंत कम दरों पर भूमि की खरीद कर रहा है। वहां पर इस मामूली मुआवजा वृद्धि से भारी नाराजगी फैल गई है। वे उद्वेलित हैं और सड़कों पर उतर रहे हैं। नए कानून के अनुसार सर्किल रेट से 4 गुना मुआवजे की मांग कर रहे हैं। किसान तब तक आंदोलनरत रहेंगे जब तक कि उनकी समस्या हल नहीं हो जाती है।
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