*8 फरवरी 2023, आज 70 वर्ष के पूर्ण हुए**भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश मीडिया प्रभारी सुरेश कुमार कनौजिया गोंडा*
भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश मीडिया प्रभारी सुरेश कुमार कनौजिया गोंडा
जिंदगी में पीछे नजर मारता हूं तो पाता हूं कि कम्युनिस्ट पार्टी की राजनीति में और राजनीतिक जीवन के 52 वर्ष हो गए ।यद्यपि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता मुझको 18 वर्ष होने पर ही 1971 में मिली थी और मैं अपने आपको मेंबरशिप प्राप्त होने के पहले से ही पक्का कम्युनिस्ट समझता था!
1968 में हाई स्कूल के विद्यार्थी की हैसियत से लखनऊ जेल में 15 वर्ष की उम्र में बंद हो गया था। मुझे याद है परिवार में सुनगुन सुनाई दी कि फला का लड़का तो जेल चला गया!!!
परंतु मेरे माता पिता ने मुझे निरूत्साहित नहीं किया ,क्योंकि वह दोनों ही स्वाधीनता संग्राम के लड़ाकू रह चुके थे। घरवालों से ही सुना था मैंने कि वह कैसे पत्थर पर सोता होगा! परंतु मुझे तो भगत सिंह दिखाई दे रहे थे ,मार्क्स और लेनिन, क्रांति ,समाजवाद, पूंजीवाद का शोषण ,गैर बराबरी।
खैर....
जेल जाने का कसूर था , कि ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के विद्यार्थी अमेरिका द्वारा वियतनाम में की जा रही कारपेट बोम्बिंग के विरोध में लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे थे और अमेरिकन लाइब्रेरी के सामने प्रदर्शन का आयोजन था।
शाम का समय था। मशाल जलूस लेकर हम लोग जा रहे थे। हम लोगों को रोक लिया गया। पकड़ लिए गए और लखनऊ की जेल में बंद कर दिए गए।
बड़ी-बड़ी धाराएं लगा दी गई।
कांग्रेस की हुकूमत थी।
बाद में सारे मुकदमे वापस ले लिए गए।
पर जेल का तजुर्बा 15 वर्ष की उम्र में हो गया।
उसनें सामाजिक रूप से निर्भीक बना दिया।
बस उसके बाद से पीछे तो मुडना सीखा ही नहीं। चलते ,चलते गए ।चलते गए। देश के लिए, प्रदेश के लिए अपनी पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के लिए ।मजदूरों किसानों के लिए। देश की शोषित पीड़ित जनता के लिए।
आज भी चल रहे हैं, पार्टी ने गौरव प्रदान किया कि आज साधारण विद्यार्थी से गौरवशाली उत्तर प्रदेश पार्टी के राज्य सचिव हैं और जीवन पर्यंत चलते ही रहेंगे ।
अभी समाजवाद का ध्येय पूरा नहीं हुआ ।उसके विपरीत धारा इस समय राज्य सत्ता में है तो संघर्ष तो और भी कठिन हो गया।
पर ठीक है संघर्ष ही जीवन है।
लड़ेंगे जीतेंगे।
कार्ल मार्क्स ने सिखाया।
महात्मा गांधी ने सिखाया।
भगत सिंह और कान्तिकारियों की शिक्षा ने सिखाया।
महान स्वाधीनता संग्राम के इतिहास ने सिखाया।
अरविन्द राज स्वरूप
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