*अवाम की समस्याएं पहले ही क्या कम थीं जो उनकी कमर तोड़ने वाला बजट झौंक दिया गया?**अडानी अम्बानी ने देश लूट लिया मगर बुलडोजर गैरेज से बाहर नहीं आया। क्यों?**उलटे उनके घपलों पर पर्दा डालने की हर मुमकिन कोशिश की जारही है और विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है।**अतएव भाकपा ने अभियान चलाने और 13 फरबरी को सड़कों पर उतरने का निर्णय लिया है।**इसी उद्देश्य से वितरण हेतु पर्चे का प्रारूप तैयार किया गया है और जनहित में उसे सार्वजनिक किया जा रहा है।**पर्चे का प्रारूप**भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश मीडिया प्रभारी सुरेश कुमार कनौजिया गोंडा*
भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश मीडिया प्रभारी सुरेश कुमार कनौजिया गोंडा
केन्द्रीय बजट के जनविरोधी प्राविधानों को बदले जाने और अडानी के घपलों की संसदीय समिति से जांच कराने को भाकपा का प्रदर्शन दिनांक- 13 फरबरी 2023 को
प्यारे भाइयो और बहिनो,
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने केन्द्रीय बजट के जनविरोधी प्राविधानों और भाजपा और प्रधानमंत्री के चहेते प्रमुख उद्योगपति श्री गौतम अडानी के घपलों- घोटालों के खिलाफ अभियान चलाने और 13 फरबरी को इन दोनों मामलों को लेकर विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।
भारत सरकार द्वारा 2023 और 24 के लिये संसद में पेश किया गया बजट पूरी तरह से भाजपा के आका कारपोरेटों के पक्ष में और किसानों कामगारों युवाओं और मध्यवर्ग के हितों के विरूध्द है। बजट में बढ़ती बेरोजगारी को कम करने, अमीरों और गरीबों के बीच दिन ब दिन गहरी होरही खाई को पाटने, महंगाई को नीचे लाने, मुद्रास्फीति को काबू करने तथा ग्रामीण क्षेत्र की चौतरफा बढ़ रही समस्याओं को काबू में लाने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। जमीनी वास्तविकताओं पर ठोस काम करने के बजाय बजट में यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था में सबकुछ ठीक- ठाक चल रहा है और दुनियां में भारत का डंका बज रहा है।
बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, मनरेगा, खाद्य सुरक्षा तथा समाज कल्याण के लिये आबंटित धन बेहद कम कर दिया गया है, जिससे आम जनता की मुसीबतें और बढ़ेंगी और उन्हें भूख तथा तवाही की ओर धकेलेंगी।
हमारे किसान जब बढ़ी लागतों, फसलों के निम्नतम मूल्य, प्राक्रतिक आपदाओं और सरकारी भ्रष्टाचार को झेल रहे हैं, बजट में क्रषी के लिये आबंटनों को घटा कर मात्र 8500 करोड़ कर दिया गया है। उनकी मदद के लिये कोई कदम नहीं उठाया गया। कर्ज हेतु राशि बढ़ाना उन्हें कर्ज के जाल में फंसाना है।
खाद्य सब्सिडी को रुपये 2॰ 8 लाख करोड़ से घटा कर 1॰ 97 लाख करोड़ कर दिया गया है। इसका अर्थ है कि गरीबों को मुफ्त राशन देना 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद बंद कर दिया जाएगा। गत बजट में मनरेगा के लिये 89,000 करोड़ रुपये आबंटित किए गए थे, जिसे इस बार घटा कर रुपये 60,000 करोड़ कर दिया गया है।
आयकर में दिख रही छूटों को दूसरी मदों से बसूल करने की तरकीबें भिड़ाई गयी हैं। रुपये की कीमतों में अभूतपूर्व गिरावट और महंगाई ने इन रियायतों को पहले ही निष्प्रभावी कर रखा है। बजट में छोटे और मझोले उद्यमों को दी जाने वाली सब्सिडी के बारे में भी कोई स्पष्टता नहीं है। चुनावी साल में गुलाबी बजट पेश करने की तमाम कोशिशों के बावजूद यह बजट देश के 80 प्रतिशत नागरिकों पर कुल्हाड़ा चलाते साफ नजर आरहा है।
देश का बच्चा- बच्चा जानता था कि भाजपा/ आरएसएस की हाइब्रिड सरकार दो पूंजीपति घरानों पर पूरी तरह मेहरबान रहीं हैं और मोदी सरकार के 9 सालों में इन दोनों की संपत्तियाँ सुरसा के बदन की तरह बढ़ती चली गईं। अब विदेशों में हुयी खोज- “हिंडनबर्ग रिसर्च” द्वारा किये गये खुलासों से अडानी के घपले- घोटालों की कलई खुल गयी और पाप की कमाई से खड़ी की गयी दौलत की उसकी लंका लगातार ढहती जा रही है। मामले के स्पष्ट खुलासे के बाद भी मोदी सरकार सांसदों की समिति से जांच कराने को तैयार नहीं है। न ही प्रधानमंत्री जी ने मुंह खोला है। क्रीत दास की तरह टीवी चेनल्स भी घपलों पर पर्दा डालने में जुटे हैं।
बैंक और बीमा कंपनी में जमा जनता के धन पर सरकार के समर्थन से डाका डालने की इस साजिश को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी कदापि बर्दाश्त नहीं कर सकती। अतएव बजट में गाँव, गरीबों, किसानों- कामगारों और युवाओं को राहत दिलाने और अडानी और सरकार के नापाक गठजोड़ से हुये घपलों की संसदीय समिति से जांच कराने को भाकपा 13 फरबरी 2023 को देश भर में प्रदर्शन करेगी।
उत्तर प्रदेश में हर जिला केन्द्र पर प्रदर्शन कर महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन दिये जायेंगे। जनता जनार्दन से अपील की जाती है कि उनके हितों के लिये किये जा रहे संघर्षों में भाकपा का साथ दें।
निवेदक-
जिला काउंसिल
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
जनपद- ......................
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