*अन्नदाताओं के लिए मुसीबत बने छुट्टा पशु, फसलों को बर्बाद कर रहा मवेशियों का झुड़**ब्यूरो मंडल चीफ कनौजिया/ संवाददाता शिव कुमार कनौजिया गोंडा*






ब्यूरो चीफ मंडल सुरेश कुमार कनौजिया/ संवाददाता शिव कुमार कनौजया गोंडा

खेतों में लगी फसलों को बर्बाद कर देता है मवेशियों का झुंड
कहीं गौशाला नहीं, तो कहीं गौशालाओं में पर्याप्त जगह का अभाव
गोण्डा। सरकार अन्ना मवेशियों के संरक्षण के नाम पर लाखों रुपये पानी की तरह बहा रही है, लेकिन इसके बावजूद सड़कों व खेतों में सैकड़ों की संख्या में छुट्टा मवेशी मंडराते हुए देखे जा सकते हैं। हाईवे से लेकर खेतों तक में इन मवेशियों की धमाचौकड़ी है। हाईवे पर मवेशियों की जान के साथ ही राहगीर भी मौत के आगोश में समा रहे हैं।
हम आपको जिले के किसानों की हालत से रूबरू कराते हैं। जनपद के विभिन्न विकास खंडों में गौशाला होने के बाद भी आवारा पशु खेतों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। जिले में तमाम गांव ऐसे भी हैं, जहां गौशाला का निर्माण ही नहीं हुआ है, जिसके कारण वहां के किसान अपनी फसलों को देखकर बहुत ही ज्यादा परेशान नजर आ रहे हैं।
ग्राम सभा काजीदेवर के किसान सत्य प्रकाश तिवारी ने बताया कि आवारा पशु किसानों की फसल चट कर जा रहे हैं। फसल बचाने के लिए किसान दिन-रात खेतों की रखवाली करके परेशान हैं, लेकिन कोई स्थायी हल नहीं निकल पा रहा है। यही हाल जिले की उमरी ग्राम पंचायत का भी है। यहां ग्रामसभा में अभी तक गौशाला का निर्माण ही नहीं हुआ है।
यहां के आवारा
 पशुओं को पकड़कर डोहरी में बने गौशाला में छोड़ दिया गया था, लेकिन वहां पर भी पशु सुरक्षित नहीं हैं। किसानों ने डीएम से समस्या के समाधान की गुहार लगाई है। जिले के बेलसर ब्लॉक क्षेत्र के गांवों में झुंड के रूप में घूम रहे आवारा मवेशियों ने किसानों के दिन का चैन और रातों की नींद हराम कर दी है।
आवारा पशुओं से खेतों में खड़ी गेहूं, सरसों आदि की फसलों को बचाने के लिए किसान हर जुगत करके हार चुके हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही है। स्थायी हल नहीं निकलने से अन्नदाता फिक्रमंद हैं। सरकार और जिला प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो मोटी लागत और कड़ी मेहनत के बाद भी उपज घर तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा।
बेलसर के किसान धनीराम सिंह ने बताया कि खेतों में खड़ी गेहूं, सरसों व मदर की फसल को छुट्टा पशु चट कर रहे हैं और इनकी रोकथाम के लिए कोई स्थाई हल नहीं निकल पा रहा है। सरकारी नौकरी की तरह घर के बच्चों से लेकर बड़े तक बारी-बारी से खेतों पर मुस्तैद रहते हैं।
मवेशी इतने होशियार हो गए हैं कि जब तक कोई खेतों पर रहता है, तब तक नहीं आते हैं। नहाने और खाने के लिए घर चले जाने पर मवेशियों का झुंड खेतों को निशाना बनाकर फसलों को तहस-नहस कर देता है।

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