*लखनऊ, 11 दिसम्बर 2022मध्यकालीन इतिहास**भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश मीडिया प्रभारी सुरेश कुमार कनौजिया*
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश मीडिया प्रभारी सुरेश कुमार कनौजिया
2014 के पश्चात से भारतीय जनता पार्टी - आर एस एस की बनी सरकार के पक्षकारों की जब मैं अल्पसंख्यकों पर की गयी साम्प्रदायिक टिप्पणियों को सुनता हूं, अथवा उनके विरुद्ध हुई हिंसा की खबरों को पढ़ता हूं तो मुझको लगता है कि यह सब तो उन सब पर हो रहा है जो भारतीय हैं।
भले ही उनका धर्म हिंदू ना हो।
कहां सन 1175 और कहां सन 2022.
यह परिस्थितियां मुझको बार-बार विवश करती है कि मैं मध्ययुग के इतिहास को फिर से देखूं और जब मैं इतिहास को देखता हूं और पाता हूं कि महमूद गजनवी नें संन 1027 ईस्वी में अपना अंतिम आक्रमण किया था।मोहम्मद गौरी नें अपना प्रथम आक्रमण 1175 ईस्वी में किया था और दोनों के आक्रमणों में 148 वर्षों का फासला था।
दोनों नें उत्तर पश्चिम से हिंदुस्तान में प्रवेश किया था और गौरी का साम्राज्य दूर तक बन गया।
गुलाम वंश के तुर्क सुल्तानों की स्थापना हो गई। तत्कालीन राजपूत राजा, जिसनें कुछ राजा तो तुर्कों से बहादुरी से लड़े पर ,अंततोगत्वा हार गए।
परंतु सम्यक रूप से पाता हूं कि राजपूत राजा तुर्कों से लड़ ही न पाए।बड़ा आश्चर्य और हैरानी होती है। क्या उनमें दूरदर्शिता और सैन्य विद्या का आभाव था।
शायद।
नहीं तो उत्तर पश्चिम की सीमाओं के अंदर तुर्कों को वह घुसने ही ना देते।
क्या गौरी का बदला आज लिया जा रहा है?
जबकि हम आज एक प्रभुता संपन्न आधुनिक राज्य हैं ।
हमारा एक संविधान है जो प्रत्येक धर्मावलंबी को आश्रय प्रदान करता है।
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