*प्रदूषण और उससे उत्पन्न रोगों के फैलाव को काबू में लायेँ सरकार: डा॰ गिरीश**भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मीडिया प्रभारी सुरेश कुमार कनौजिया उत्तर प्रदेश*
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मीडिया प्रभारी सुरेश कुमार कनौजिया उत्तर प्रदेश
लखनऊ- 3 नवंबर 2022, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डा॰ गिरीश ने कहा कि मच्छरजनित रोग लोगों को पहले ही चपेट में लिये हुये हैं, और अब प्रदूषणजनित रोगों ने लोगों पर कहर ढाना शुरू कर दिया है। उन्होने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश और केन्द्र दोनों ही सरकारें लोगों के जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा के दायित्व से भाग रही हैं।
यहां जारी एक प्रेस बयान में डा॰ गिरीश ने कहा कि राजधानी दिल्ली और उसके आसपास लगभग दो- दो सौ किलो मीटर की दूरी तक प्रदूषण बेकाबू होता जा रहा है। हवा की गुणवत्ता राजधानी और एनसीआर में ‘बहुत खराब’ तथा नोएडा में ‘गंभीर श्रेणी’ में पहुंच चुकी है। आंकड़ों में देखा जाये तो इसका स्तर बुधवार सुबह नोएडा में एक्यूआई 406 और दिल्ली में 403 था।
परिणामस्वरूप तमाम लोग निमोनियां, खांसी और सीने में संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं और अनेकों को आईसीयू में भर्ती किए जाने की खबर है। चिकित्सा विशेषज्ञ इसे “चिकित्सा आपातकाल” बता रहे हैं। उनके अनुसार प्रदूषण का अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रभाव होता है। जब फेफड़े हवा के ‘संपर्क’ में आते हैं, तो लोग “तुरन्त” प्रभावित होते हैं। बाद में यही धुआं श्वास नली और फेफड़ों में ‘सूजन’ का कारण बनता है। इसके बाद जहरीले रसायन फेफड़ों से रक्त में पहुंच जाते हैं और हर अंग को प्रभावित करते हैं।
स्थितियाँ इस कदर गंभीर होने के बावजूद न तो केन्द्र सरकार और न ही राज्य सरकारें प्रदूषण को नीचे लाने को कोई गंभीर कदम उठा रही हैं। भाजपा और आप दोनों ही पार्टियां इसके लिये किसानों द्वारा ‘पराली’ जलाने को जिम्मेदार बता कर अपने दायित्व से भाग जाती हैं। जबकि प्रदूषण का प्रमुख कारण सरकार की वाहन नीति, शहरीकरण नीति और धनिक वर्ग द्वारा फोड़े जाने वाली आतिशबाज़ी अधिक है। निहित राजनैतिक स्वार्थों के तहत लाखों दीपक जला कर सरकार ने खुद प्रदूषण को फैलाने में योगदान किया है। यह जनता के जीवन से खिलवाड़ है।
सरकार कितना भी झूठ बोले और जो भी दावे करे, इन रोगों का फैलाव बढता ही जा रहा है। ऊपर से लोग निजी चिकित्सकों के हाथों लुटने को अभिशप्त हैं। सरकारी अस्पतालों में दवा, जांच उपकरणों, चिकित्सकों और चिकित्सा विशेषज्ञों का नितांत अभाव है। सरकार ने आज ही कहा है कि स्वास्थ्य महकमे में रिक्तियों को भरा जायेगा और जल्दी ही 2383 विशेषज्ञ तथा 488 जनरल फिजीशियन भर्ती किए जाएंगे। सवाल उठता है कि ये भर्तियां गत 6 सालों से क्यों नहीं की गईं और भर्ती होने तक की अवधि में मरीजों का क्या हाल होगा?
डा॰ गिरीश ने प्रदूषण को नीचे लाने, प्रदूषण, मच्छरों और उनसे उत्पन्न बीमारियों के इलाज की समुचित व्यवस्था किए जाने और सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत किए जाने की मांग की है।
डा॰ गिरीश, सदस्य राष्ट्रीय कार्यकारिणी
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
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