*बिना वैकल्पिक तैयारी के की गयी नोटबन्दी से जनता को होरही भारी परेशानियों से निजात दिलाने की आवाज उठाने को भाकपा का उत्तर प्रदेश में आन्दोलन 23 नवंबर को**भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मीडिया प्रभारी उत्तर प्रदेश सुरेश कुमार कनौजिया*
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मीडिया प्रभारी उत्तर प्रदेश सुरेश कुमार कनौजिया
लखनऊ- 20, नवंबर- केन्द्र सरकार द्वारा कालाधन निकालने के नाम पर आम जनता पर किये गए नाटकीय हमले के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 23 नवंबर को समूचे उत्तर प्रदेश में प्रतिरोध कार्यवाहियां आयोजित करेगी. भाकपा के केन्द्रीय नेतृत्व के आह्वान पर होने जारही इस कार्यवाही के तहत जगह जगह भारतीय स्टेट बैंक की शाखाओं, आयकर कार्यालयों तथा केंद्र सरकार के अन्य उपक्रमों के समक्ष धरने व प्रदर्शन आयोजित किये जायेंगे और महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन दिये जायेंगे.
इस संबंध में भाकपा के राज्य सचिव मंडल की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बिना मुकम्मिल वैकल्पिक व्यवस्था किये की गयी नोटबन्दी के चलते आम जनता की मुसीबतें बेइंतहां बढ़ गयी हैं. इस तुगलकी आदेश को हुए 12 दिन बीत जाने के बाद भी लोगों की मुसीबतें लगातार बढ़ती चली जारही हैं. रोज- ब- रोज लगाये जा रहे नए- नए प्रतिबंधों के चलते लोगों के लिए पैसे की निकासी करना समस्या बन गयी है. छोटे, मझोले और बड़े बाजार जो अनाज और आवश्यक वस्तुयें मुहैया कराते हैं, बुरी तरह प्रभावित हो गये हैं. असंगठित श्रमिकों के रोजगार बंद होगये हैं, छोटे प्रतिष्ठान बंद होगये हैं. भारत के गाँवों पर सबसे बुरा असर पडा है क्योंकि वहां बैंक ही नहीं हैं. बैंको में कतार लगाने के दरम्यान अथवा कतार में बार बार लगने के बावजूद कैश न मिल पाने से तनावग्रस्त लोग ह्रदयगति रुकने से मर रहे हैं या फिर आत्महत्या कर रहे हैं. काम के बोझ तले दबे बैंककर्मी बीमार पड़ रहे हैं और कई की तो मौत हो चुकी है. अब तक देश में लगभग 75 लोगों की मौतें हो चुकी हैं. पूरी कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी बेहद संवेदनशील है जिसमें कहा गया है कि यह जनता पर कारपेट बम फोड़ने जैसा है.
विडंबना यह भी है कि नोटबन्दी की इस तुगलकी कार्यवाही का विरोध करने वाले हरेक को भाजपा वाले कालेधन वालों के समर्थक और राष्ट्रविरोधी करार दे रहे हैं. जबकि सच यह है कि कालेधन के असली जखीरों पर भाजपा सरकार द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गयी. विदेशों में जमा धन हो अथवा घरेलू कालाधन, के अलमबरदारों के खिलाफ आज तक कुछ भी नहीं हुआ. बैंकों के बड़े कर्जदारों पर बकाया राशियाँ बट्टे खाते में डाली जा रही हैं. भाजपा की रैलियों और रथ यात्राओं पर अरबों रुपये खर्च किये जा रहे हैं जबकि आम आदमी एक एक पैसे को तरस गया है. इसको जनता के समक्ष उजागर करना होगा.
इसीलिये भाकपा ने 23 नवंबर को पूरे प्रदेश में जनकार्यवाही करने का निश्चय किया है. इस कार्यवाही के तहत नोटबन्दी से तबाह जनता को तत्काल राहत दिलाने की मांग की जायेगी. पुराने 500 और 1,000 के नोटों को 30 दिसंबर तक चालू रखने, दो हजार के नोट के फुटकर ही नहीं मिल रहे हैं अतएव उसे प्रचलन से वापस लेने, सहकारी बैंकों को भी विनिमय हेतु राशि उपलब्ध कराने, नोटबन्दी की वजह से हुई मोतों पर पांच लाख प्रति मुआबजा मुआबजा देने, बैंक कर्मियों से शिफ्ट में काम लेने और मृत बैंक कर्मियों के परिवारों को हर संभव राहत देने तथा काले धन के वास्तविक जखीरों को जब्त करने की मांग की जायेगी.
भाकपा राज्य सचिव मंडल ने अपने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया है कि वे बैंकों पर संकट झेल रहे लोगों की हर संभव मदद करें. उन्हें फ़ार्म दिलाने, उन्हें भरने तथा चाय नाश्ता कराने का काम करें.
भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने बताया कि भाकपा की कतारें पिछले कई दिनों से जगह जगह जनता की इन समस्याओं को उठा रही हैं. कल 21 नवंबर को कानपुर में वामपंथी दलों द्वारा संयुक्त प्रदर्शन किया जायेगा तथा 22 नवंबर को भाकपा कार्यकर्ता तमाम संवेदनशील शख्सियतों के साथ मिल कर लखनऊ में रिजर्व बैंक पर प्रदर्शन करेंगे.
डा. गिरीश, राज्य सचिव
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