*भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राज्य कार्यालय- 22, केसरबाग, लखनऊ- 226001 दिनांक- 1 नवंबर, 2022* * भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मीडिया प्रभारी सुरेश कुमार कनौजिया उत्तर प्रदेश गोंडा*





भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मीडिया प्रभारी सुरेश कुमार कनौजिया उत्तर प्रदेश गोंडा

मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ।   

विषय- 22 अक्तूबर 2022 को लखनऊ के इंदिरा नगर स्थित मकान संख्या- 18/ 28 में लगी आग, सेवा निवृत्त आईजी की मौत तथा फायर ब्रिगेड व बचाव संबंधी अन्य व्यवस्थाओं के संबन्ध में। 

महोदय 

22 अक्तूबर 2022 की रात्रि लगभग 10: 30 बजे राजधानी लखनऊ के इंदिरा नगर स्थित मकान संख्या- 18/ 28 के प्रथम तल पर संभवतः शार्ट- सर्किट से आग लग गयी और उसमें रह रहे भवन स्वामी पूर्व आईपीएस एवं उत्तर प्रदेश के सेवा निवृत्त महानिरीक्षक- पुलिस श्री दिनेश चन्द्र पाण्डेय, उनकी पत्नी श्रीमती अरुणा पाण्डेय एवं बीमार युवा पुत्र शशांक पाण्डेय को भीषण धुयें से हुयी गंभीर बेहोशी की अवस्था में स्थानीय श्री राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया। 

चिकित्सकों ने कुछ ही मिनटों बाद पूर्व आईजी को मृत घोषित कर दिया। उनकी पत्नी कल ही एक निजी अस्पताल से बाहर आयी हैं और पुत्र शशांक अभी भी वेंटिलेटर पर हैं। 

पुलिस अधिकारी होने के साथ साथ श्री दिनेश चन्द्र पाण्डेय शायर भी थे और “नजर कानपुरी” के नाम से विख्यात थे। वे एक प्रसिध्द रंगकर्मी भी थे। 

22 नवंबर की रात प्रथम तल पर ड्राइंग रूम में लगी आग ने बाहर निललने के रास्ते तक को रोक दिया। सेवा निवृत्त आईजी और उनकी पत्नी ने अपने फोन से पुलिस आदि और स्थानीय रिशतेदारों को सूचित किया। उनके रिशतेदारों ने भी पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दे दी। धुयें का दबाव बढ़ने पर आग में फंसे तीनों ने पीछे वाले बेड रूम में इस आशा से बन्द कर लिया कि अब फायर ब्रिगेड आग बुझा कर उन्हें बचा लेगी। 

सेवानिवृत्त आईजी और उनकी पत्नी के फोन रात्रि 10: 47 बजे तक एक्टिव थे। उसके बाद संभवतः वे बेहोश होने लगे थे और फोन्स का प्रयोग नहीं कर पा रहे थे। 

लगभग 11: 00 बजे पहुंची फायर ब्रिगेड ने जल्दी ही आग पर काबू पा लिया। लेकिन इसके बाद न तो फायर ब्रिगेड और न ही पुलिस ने मकान में घुस कर तीनों को बचाने के उपाय किए। फायर ब्रिगेड कर्मी ऐसे उपकरण एवं मास्क आदि भी साथ नहीं लाये थे जिनकी मदद से उस कमरे से उन्हें निकाला जाता। हज़रत गंज से लायी गयी विशेष हाइड्रौलिक मशीन भी आपातस्थिति को नजरंदाज करते हुये कोलोनी के बाहर इस बहाने से खड़ी रही कि प्रवेश मार्ग के बाहर/ ऊपर लगा बोर्ड टूट जायेगा। 

काफी समय इसी में जाया हो गया। तब सरकारी तंत्र की लापरवाही देख मोहल्ले के कुछ साहसी नौजवान रिस्क लेकर घर में घुसे और तीनों को बेहोशी की अवस्था में बाहर लाये। तब परिजन और पुलिस उन्हें लोहिया अस्पताल ले गए। 

यदि फायर ब्रिगेड, हाइड्रौलिक मशीन् एवं तंत्र ने तत्परता दिखाई होती तो तीनों को 10 मिनट पहले ही बचाया जा सकता था और वर्षों तक पुलिस में रह कर जनता की सेवा करने वाले और बहुमुखी प्रतिभा के धनी श्री दिनेश चन्द्र पाण्डेय का जीवन संभवतः बचाया जा सकता था। बिना आवश्यक जांच किए ही पुलिस ने  घोषित कर दिया कि आग ए॰ सी॰ से लगी है, जबकि ए॰ सी॰ चल ही नहीं रहा था। इस पूरे प्रकरण से स्पष्ट हो गया है कि आज भी हमारा सिस्टम और बचावतंत्र कितना लापरवाह है और प्रोफेशनलिज़्म से शून्य है। 

इस भयावह त्रासदी से शोक में डूबे परिजनों ने सब कुछ सीने पर पत्थर रख के सह लिया और कहीं कोई शिकायत तक नहीं की। शायद भविष्य में भी वे खामोश ही रहें। लेकिन पीड़ित परिवार का निकट संबंधी होने और एक संवेदनशील नागरिक के नाते इन पक्तियों के लेखक ने हर स्तर से जानकारी जुटा कर उपर्युक्त तथ्यों और घटनाक्रम को संकलित किया है। 

भविष्य में ऐसी मनहूस घटनाओं से किसी के जानमाल की ऐसी तवाही न हो, अतएव कुछ सुझाव प्रेषित कर रहा हूँ। आशा है आप और आपका प्रशासन संज्ञान ले कर उचित कदम अवश्य उठायेगा। 

1-  उत्तर प्रदेश फ़ायर सर्विस को प्रोफेशनल एवं जबावदेह बनाया जाए। घटना के बाद उनकी भूमिका की जांच कराई जाये और ज़िम्मेदारी तय कर उचित कार्यवाही हो। 

2-  फ़ायरब्रिगेड को एनडीआरएफ़ की तरह प्रशिक्षित और जरूरी उपकरणों से लैस किया जाये। समय समय पर उनकी तैयारी और ट्रेनिंग की जांच की जाये। 

3-  जहां दुर्घटनाओं से जानमाल की हानि हुयी हो उसकी मजिस्टीरियल जांच कराके रिपोर्ट की एक प्रति पीड़ित परिवार को दी जाये। 

4-  गली मोहल्लों और आबादियों के प्रवेश द्वार के ऊपर बनाए गए अवरोधों को समस्त प्रदेश में हटाया जाये ताकि आपातकाल में वे दुर्घटनाओं से निपटने में बाधक न बन सकें। 

5-  हर 5 हजार की आबादी पर नागरिकों खासकर युवाओं की बचाव समितियां गठित की जाएँ और उन्हें बचाव के लिये प्रशिक्षण और उपकरण दिये जाएँ। 

अन्य सुझाव भी हो सकते हैं, जिन्हें बाद में प्रेषित करूंगा। 

तंत्र की यह विफलता इसलिये भी ध्यान देने योग्य है कि यह राजधानी में एक पाश कालोनी में एक पूर्व सर्वोच्च अधिकारी के जीवन की समाप्ति के लिए जिम्मेदार है। अन्य स्थानों और सामान्य जनों पर क्या बीतती है, उसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है।   

इस अपेक्षा के साथ कि आपकी सरकार के स्तर पर इस घटना और सुझावों पर अवश्य ध्यान दिया जायेगा और ठोस कदम उठाए जाएंगे- 

 भवदीय 

डा॰ गिरीश, सदस्य राष्ट्रीय कार्यकारिणी 

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 

प्रतिलिपि- 

1-  महानिदेशक, उत्तर प्रदेश पुलिस, लखनऊ। 

2-  प्रमुख सचिव गृह, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ।   

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