*जिला कारागार में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन**ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौजिया/नगर संवाददाता शिव कुमार कनौजिया गोण्डा*
ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौजिया/नगर संवाददाता शिव कुमार कनौजिया गोण्डा
गोण्डा उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ व माननीय जनपद न्यायाधीश रविन्द्र कुमार-1 के निर्देशों के अनुपालन में जिला कारागार, गोण्डा में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन एवं निरीक्षण सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण विश्व जीत सिंह द्वारा किया गया।
विधिक साक्षरता शिविर में सचिव श्री सिंह द्वारा विचाराधीन बन्दियों के शिकायतों के निराकरण के बावत जानकारी देते हुए बताया गया कि जेल में निरूद्ध विचाराधीन बन्दियों के अधिकारों की बात प्रत्येक स्तर पर होती रही है। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्तियों ने अपने कई निर्णयों में सजायफ्ता और विचाराधीन कैदियों के अधिकारों के बारे में उल्लेख किया है। विचाराधीन कैदी या फिर सजायाफ्ता कैदी के अधिकार जेल में भी बने रहते है और कानून के हिसाब से ही उनके अधिकारों पर अंकुश लगाया जा सकता है। आपराधिक विधि के अन्तर्गत किसी भी व्यक्ति को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता, जब तक कि न्यायालय आरोपी को दोषी नहीं मानता। जब भी किसी व्यक्ति के विरूद्ध कोई आरोप लगाया जाता है तो वह मात्र आरोपी होता है। ऐसे में उसे यह संवैधानिक अधिकार है कि उसे अपने बचाव का मौका मिले। इस सन्दर्भ में संविधान के अनुच्छेद-22 में मूल अधिकार है कि प्रत्येक आरोपी को बचाव का मौका दिया जाए। इसके तहत अदालत का कर्तव्य है कि जब भी कोई आरोपी अदालत में पेश हो तो वह उससे पूछे कि क्या उसे वकील चाहिए ? वकील न होने पर अदालत आरोपी को सरकारी खर्चे से वकील मुहैया कराती है। विधिक साक्षरता शिविर में सचिव द्वारा निःशुल्क विधिक सहायता के सन्दर्भ में सांविधानिक उपबन्ध, दण्ड प्रक्रिया संहिता में वर्णित उपबन्ध व माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये अद्यतन निर्णयों पर भी विस्तृत रूप से जानकारी दिया गया।
इस अवसर पर जेलर शिव प्रताप मिश्रा, डिप्टी जेलर हरी प्रसाद मिश्रा व विवेक कुमार सिंह सहित अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
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