*गोंडा / जिला महिला अस्पताल सरकार के दावे सब हवा हवाई ढाई माह मे खरीदवाया 6.72 लाख का सर्जिकल सामान**ब्यूरो मंंडल प्रभारी सुरेश कनौजिया/प्रमुख संवाददाता खुशबू कनौजिया गोण्डा*
ब्यूरो मंंडल प्रभारी सुरेश कनौजिया/प्रमुख संवाददाता खुशबू कनौजिया गोंडा
गोंडा। जिला महिला अस्पताल मैं पिछले ढाई महीनों से सर्जिकल सामानों का टोटा है। संसाधनों की कमी से जूझ रहे अस्पताल में सिजेरियन से पहले गर्भवती के परिजनों को सर्जिकल का सामान खरीदना पड़ रहा है।
इसके लिए अस्पताल का स्टाफ सर्जरी से पहले ही तीमारदारों को एक पर्ची थमा देता है। इस पर्ची में लिखे 800 रुपया कीमत के सामान को सिजेरियन से ओटी स्टाफ को देने के बाद ही गर्भवती को आपरेशन कक्ष में ले जाया जाता है। अस्पताल स्टाफ की माने तो पिछले ढाई माह में सिजेरियन के हुए 840 केस में तीमारदारों से करीब 6.72 लाख की कीमत का आपरेशन संबंधी सामान बाहर से ला कर देना पड़ा है।
सरकारी अस्पतालों में मात्र एक रुपया के पर्चे पर मुफ्त इलाज का दावा जमीनी हकीकत से कोसो दूर दिखता है। जिला महिला अस्पताल में दवाओं व संसाधनों की किल्लत के चलते गर्भवती के तीमारदारों को निजी अस्पताल की तरह सर्जरी से जुड़ा सभी सामान बाहर से लाना पड़ रहा है। अस्पताल की ओटी में बीते काफी समय से स्पाइनल निडिल, कैथेटर, सर्जिकल ग्लब्स, काटन, यूरो बैग, ट्यूब, ल्यूकोप्लास्ट, पाइप, रबर शीट, ईटी ट्यूब व बेहोशी का इंजेक्शन सहित अन्य जरूरी सर्जिकल सामान का टोटा चल रहा है। ऐसे में आपरेशन से पहले तीमारदारों को सिजेरियन के लिए जरूरी सामान बाहर से लाने को लिस्ट पकड़ा दी जाती है। इसकी खरीद पर करीब 800 रुपया खर्च आता है।
बीते ढाई माह के दौरान जिला महिला अस्पताल में प्रसव के लिए 840 सिजेरियन केस हुए। इस दौरान शल्य क्रिया के लिए गर्भवती के परिजनों से करीब 6.72 लाख रुपया का सामान बाहर से मंगवाया गया। इसमें बाहर से मंगवाई जाने वाली दवाओं को खर्च शामिल नहीं है।
बाहर से अल्ट्रासाउंड पर खर्च हुए 24.70 लाख
जिला महिला अस्पताल में संसाधनों की किल्लत के साथ ही बीते 19 दिनों से अल्ट्रासाउंड कक्ष में भी ताला लगा है। ऐसे में जांच के लिए ओपीडी में हर दिन आने वाली करीब 600 में से 200 महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए अस्पताल से बाहर निजी केंद्रों तक दौड़ लगानी पड़ रही है। अस्पताल में 19 दिनों से बंद अल्ट्रासाउंड जांच के कारण अब तक औसतन 38 सौ महिलाओं को बाहर से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ा है। निजी सेंटर पर जांच शुल्क के बतौर 650 रुपया लिया जाता है। ऐसे में गर्भवती व अन्य महिलाओं को 19 दिनों में सिर्फ अल्ट्रासाउंड जांच पर ही 24.70 लाख रुपया खर्च करना पड़ा है।
पिछले माह हुए सीजेरियन प्रसव
माह सिजेरियन प्रसव
मई 318
जून 322
जुलाई 200 (अभी तक)
भेजी गयी डिमांड, नहीं मिल रहा सामान
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