*अदालत की आदेश को ठेंगा दिखा रही गोंडा पुलिस वारंट के बाद भी खुलेआम घूम रहे आरोपी**न्यायालय द्वारा जारी किए गए गिरफ्तारी वारंट के बाद भी खुलेआम घूम रहे आरोपी**पीड़ित को दे रहे तरह-तरह की धमकियां, एसपी से लगाई न्याय की गुहार**ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौजिया/नगर संवाददाता शिव कुमार कनौजिया गोण्डा*
ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौजिया/नगर संवाददाता शिव कुमार कनौजिया गोण्डा
गोण्डा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पूरे प्रदेश में पुलिस-प्रशासन बड़ी-बड़ी कार्रवाई कर आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज रहा है और आरोपियों के घर पर बुलडोजर चलाया जा रहा है, लेकिन कुछ ऐसे भी आरोपी हैं जो पुलिस की बात तो छोड़िए, न्यायालय के आदेशों को भी दरकिनार कर खुलेआम घूम रहे हैं और शिकायतकर्ता को सुलह-समझौता के लिए दबाव बनाने के साथ ही तरह-तरह की धमकियां दे रहे हैं।कोतवाली नगर अंतर्गत सिविल लाइन के रहने वाले आलोक जायसवाल ने पुलिस अधीक्षक को दिए गए पत्र में कहा है कि वह वाद संख्या 648/2017 का वादी है। वाद प्रथम अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन गोण्डा के यहां विचाराधीन है। न्यायालय द्वारा विपक्षीगण गौतम पांडेय, राधेश्याम मिश्रा, सुनील कुमार जायसवाल, संजीव कुमार सिंह, राकेश कुमार पांडेय व विनोद कुमार के खिलाफ अपराध संख्या 515/2015, धारा 419, 420, 467, 468, 471 व 406 आईपीसी के तहत कोर्ट में तलब किया गया था, लेकिन विपक्षीगण न्यायालय में उपस्थित होना उचित नहीं समझे, जिसे न्यायालय ने गंभीरता से लेते हुए दिनांक 27.05.2022 को गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। वारंट थाना कोतवाली नगर के पैरोकार द्वारा न्यायालय से रिसीव कर थाना कोतवाली नगर में दाखिल किया गया, किंतु विपक्षीगणों की गिरफ्तारी पुलिस द्वारा नहीं की गई। गिरफ्तारी वारंट तामील ना होने पर न्यायालय द्वारा धारा 82 की भी कार्रवाई की गई है। पीड़ित आलोक जायसवाल ने डीएम, एसपी सहित रे. इ. क. को सोसाइटी बड़गांव के अध्यक्ष रामसरन शर्मा को दिए गये पत्र में कहा है कि विश्वस्त सूत्रों द्वारा ज्ञात हुआ है कि कोर्ट व पुलिस प्रशासन की नजर में भगोड़ा उक्त फर्जी प्रभारी सचिव संजीव कुमार सिंह और अध्यक्ष रामशरण शर्मा के संयुक्त हस्ताक्षर से समिति के कार्यों का निस्तारण किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उक्त सभी आरोपी सोसाइटी के अध्यक्ष की जानकारी में हैं। साथ ही शिकायतकर्ता ने समिति के अनाधिकृत भगोड़ा फर्जी प्रभारी सचिव तथा अन्य सह अभियुक्तों को संरक्षण न प्रदान करते हुए तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर समिति के धन की सुरक्षा करें, ताकि पूर्व की तरह गबन की पुनरावृत्ति न हो सके।
इस मामले पर रे0इ0क0 को सोसाइटी बड़गांव के अध्यक्ष रामसरन शर्मा से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि मुकदमे की जानकारी उन्हें है, लेकिन आलोक जायसवाल द्वारा हमें दिए गये पत्र की जानकारी नहीं है। पत्र प्राप्त होगा तो समिति की बैठक कर आगे की कार्रवाई की जायेगी।
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