*मंहगाई तथा बेरोज़गारी के खिलाफ वामदलों का प्रदर्शन**ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौजिया गोंडा*




ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौजिया गोंडा

भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) तथा भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के संयुक्त तत्वाधान में वाम दलों ने महंगाई और बेरोज़गारी के खिलाफ 28 मई को ग्रामसेहुंडा बारा में प्रदर्शन किया और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। 
वाम दलों ने बताया कि बेलगाम बढ़ती मंहगाई और बेरोज़गारी के दोहरे बोझ तले जनता बुरी तरह पिसी जा रही है। करोड़ों की संख्या में लोग इससे त्रस्त हैं, जिनको भुखमरी का अभिशाप झेलते हुए गरीबी की गहरी खाई में धकेला जा रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में 70 प्रतिशत की, खाद्य तेलों में 23 प्रतिशत की तथा खाद्यान्नों में 8 प्रतिशत की वृद्धि हुयी है। गेंहू, जो कि करोड़ों भारतीयों का प्रमुख आहार है, उसकी कीमतों में 14 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया है, जिस के कारण यह लोगों की पहुँच से परे होता जा रहा हैं। गेंहू की सरकारी खरीद में कमी आयी है - पिछले वर्ष की तुलना में आधी खरीद ही हुयी है। 44.4 लाख मीट्रिक टन की खरीद के लक्ष्य की तुलना में यह 20 लाख टन के स्तर को भी पार नहीं कर पाएगी। पेट्रोलियम उत्पादों एवं रसोई गैस की कीमतों में लगातार की जा रही वृद्धि तथा गेंहू की किल्लत इस व्यापक मुद्रास्फीति के लिए जिम्मेदार हैं। उधर, कोयले की कमी से बिजली के दामों में बढ़ोत्तरी हो रही है।मंहगाई के साथ-साथ बढ़ती बेरोज़गारी की दोहरी मार ने जनता की कमर ही तोड़ दी है। मनरेगा के बजट में कटौती की गई है। शहर में रोज़गार की कोई गारण्टी नहीं है। सार्वजनिक क्षेत्र की निजीकरण हो रहा है। पदों को लगातार समाप्त किया जा रहा है। जो पद रिक्त हैं भी उन पर भी भर्तियां नहीं की जा रहीं हैं। सेना तक में 2018 से भर्ती बंद है, जिसे संविदा पर देने की तैयारी चल रही है, जिसके खिलाफ हाल के दिनों में बड़े-बड़े प्रदर्शन हुए हैं। बड़े पैमाने पर नौजवानों ने रोज़गार की आस ही छोड़ दी है। नतीजा इतना भयावह है कि इलाहाबाद में नौजवानों की आत्महत्याओं तक की खबरें आ रहीं हैं। रोज़गार की मांग करने पर जनवरी के महीने में लाॅज में घुसकर नौजवानों पर बर्बर लाठीचार्ज की घटना भी हमारे सामने है। इन बुनियादी सवालों से जनता का ध्यान भटकाने और लोगों को धर्म के नाम पर बांटने के लिए सरकार की शह पर भाजपा लगातार हिजाब, अज़ान, मंदिर-मस्जिद, कश्मीर फाइल्स जैसे सवाल उठा रही है। मीडिया भी चैबीसों घंटे यही दिखाता रहता है। इसी पृष्ठभूमि में वामपंथी दल पूरे देश भर में लोगों को मंहगाई और बेरोज़गारी के खिलाफ 25 मई से 31 मई तक एक व्यापक जन-अभियान चला रहे हैं और अंतिम दिन 31 मई को प्रातः 11ः00 बजे से धरना स्थल, (पत्थर गिरजा, सिविल लाइन्स के निकट) पर एक प्रदर्शन आयोजित किया गया है। 
वाम दलों ने मांग की है कि पेट्रोलियम उत्पादों पर सभी प्रकार के उप-कर/सरचार्ज को वापस लिया जाये, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से गेंहू की आपूर्ति को बहाल की जाए, दाल एवं खाद्य तेल सहित सभी आवश्यक वस्तुओं का वितरण सुनिश्चित कर के राशन व्यवस्था को मजबूत किया जाए, सभी गैर-आयकर-दाताओं को 7,500/- रुपये प्रति माह के हिसाब से डायरेक्ट कैश ट्रान्सफर प्रदान की जाए, मनरेगा में 200 दिन काम और 600/- मज़दूरी सुनिश्चित किया जाए, मनरेगा में फण्ड बढ़ा कर उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए। प्रदर्शन में मुख्य रूप से भाकपा से ज्ञान सिंह पटेल , माकपा से भूपेंद्र पांडे, भाकपा माले से रज्जन कोल के अलावा माले के यमुनापार संयोजक पंचम लाल , राजवेन्द्र सिंह राजू, अब्दुल जब्बार  लोग उपस्थित रहे।

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