पत्रकारों ने जागरण को धुरचुक्‍क दिया, चार-चार हजार जुर्माना**ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौजया गोंडा*




ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौजिया गोंडा

: वाराणसी के श्रम न्‍यायालय ने लिया संज्ञान, बिलबिला पड़ेंगे जागरणवाले : विज्ञापन हड़पने में माहिर, लेकिन वेतन देने में छुच्‍छी निकल जाती है जागरण की : वाराणसी के श्रम न्‍यायालय ने लिया संज्ञान, वादी कर्मचारियों पर जुर्माना : 8 साल से डेढ़ सौ पत्रकार लड़ रहे मुकदमे :

दोलत्‍ती संवाददाता
वाराणसी : दैनिक जागरण के जुझारू कर्मचारियों ने अब बेहिसाब ताकत जुटा ली है। खबर है कि अपने हकों को हासिल करने के लिए इन कर्मचारियों ने आज एकजुट होकर संघर्ष किया, तो दैनिक जागरण वालों की छुच्‍छी ही निकल गयी। खबर है कि वाराणसी के श्रम न्‍यायालय ने सभी कर्मचारियों के मुकदमे में प्रतिवादी बने दैनिक जागरण संस्‍थान पर कड़ी कार्रवाई की। इसके तहत सभी मामलों पर जागरण अब चार-चार हजार रुपयों की जुर्माना अदा करेगा।
कहने को तो अपने कर्मचारियों के हितों को लेकर हिन्‍दी बेल्‍ट के मीडिया हाउसों का चरित्र लगातार दोगला ही होता जा रहा है। लेकिन असलियत देखनी हो तो वाराणसी के श्रम न्यायालय चले आइए। यहां मुकदमों की फाइलों में यह दर्ज है कि यह भ्रष्टाचार के आकंठ में यह कितने डूबे हैं। हालांकि देशभर में करीब 20 हजार से अधिक पत्रकार और गैर पत्रकार श्रम न्यायालयों में आठ साल से अखबार प्रबंधनों के खिलाफ अपने हक की लड़ाई पूरी ताकत के साथ लड़ रहे हैं।
लेकिन वाराणसी में ऐसे अखबारों के पत्रकारों और गैर-प‍त्रकार ही नहीं, बल्कि पूरे बनारस के श्रमिक जगत में अजय मुखर्जी नामक एक योद्धा ऐसे दलित और शोषित कर्मचारियों की आवाज को धारधार बनाये रखने के लिए लगातार जुटा हुआ है। अजय मुखर्जी की अनथक कोशिशों के चलते पिछले 11 मई को वाराणसी श्रम न्यायालय ने जागरण समूह के वाराणसी संस्करण के प्रबंधन पर जुर्माना लगा दिया है। यह मुकदमा यहां के 13 मुकदमों में हीलाहवाली करने पर हुआ था। जुर्माना के तहत दैनिक जागरण को चार-चार हजार रूपये अर्थदंड देना है।
काशी पत्रकार संघ के प्रमुख पदाधिकारी और विभिन्‍न समाचार संस्थानों में कर्मचारियों के उत्‍पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने वाले योगेश गुप्‍ता का कहना है किवर्ष 2014 से वाराणसी के विभिन्न अखबारों के करीब डेढ़ सौ पत्रकार और गैर पत्रकार मजीठिया वेज बोर्ड की संस्तुतियों के तहत अपना बकाया, एरियर आदि की मांग कर रहे हैं। इनमें एक-एक कर्मचारी का लाखों रूपये अखबारों के प्रबंधनों ने हड़प लिया हैं और उसे देना नही चाहता हैं। हालांकि अखबरों में जितने भी पत्रकार और गैर पत्रकार कार्यरत है, नियमानुसार उन्हें भी मजीठिया वेज बोर्ड के तहत पूरा वेतन आदि मिलने चाहिए।

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