*विज्ञान केंद्र मनकापुर गोंडा मोटे अनाज की खेती पर प्रशिक्षण संपन्न* *ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौजिया/प्रमुख संवाददाता खुशबू कनौजिया गोंडा*
ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौजिया/प्रमुख संवाददाता खुशबू कनौजिया गोंडा
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र मनकापुर गोंडा द्वारा आज दिनांक 17 मई 2022 को कृषि विज्ञान केंद्र पर मोटे अनाज की खेती विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न हुआ। प्रशिक्षण का शुभारंभ केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ० मिथिलेश कुमार पांडेय द्वारा किया गया। डॉक्टर पांडेय ने किसानों को मोटे अनाज की खेती को अपनाने की सलाह दी।
उन्होंने बताया कि मोटे अनाज की खेती स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक है। डॉ० पीके मिश्रा वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि वानिकी ने मोटे अनाज की खेती को अत्यंत उपयोगी बताया। उन्होंने बताया कि मोटे अनाज की खेती में प्राकृतिक संसाधनों का सीमित प्रयोग किया जाता है । इससे पर्यावरण सुरक्षित रहता है तथा मानव एवं मृदा स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उत्तम है। डॉ० रामलखन सिंह वरिष्ठ वैज्ञानिक शस्य विज्ञान ने मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, मक्का, कोदो, सांवा, रागी की खेती के बारे में जानकारी दी । उन्होंने बताया कि मोटे अनाज की खेती की बुवाई के लिए जून एवं जुलाई का महीना सर्वोत्तम है । इसकी बुवाई हेतु दोमट मिट्टी उपयुक्त है । मोटे अनाज की खेती में रासायनिक उर्वरकों एवं रासायनिक दवाओं का प्रयोग कम किया जाता है । इनकी बुवाई असिंचित दिशाओं में की जा सकती है । ज्वार की प्रजातियों में जीजे 44, गुजरात-1 आदि सावां की प्रजातियों में आईपीएम-97,आईपीएम- 148, यूपीटी-8 आदि मुख्य हैं। ज्वार की खेती चारा एवं दाना दोनों के लिए की जाती है । उद्यान वैज्ञानिक मनोज कुमार सिंह ने मोटे अनाज के पौष्टिक गुणों की जानकारी दी । उन्होंने बताया कि इसमें रेशा की मात्रा पर्याप्त होने के कारण स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभप्रद है । डॉक्टर दिनेश कुमार पांडेय ने मोटे अनाज की खेती में कार्बनिक खादों जैसे नाडेप एवं वर्मी कंपोस्ट के महत्व एवं प्रयोग की जानकारी दी।
इस अवसर पर प्रगतिशील कृषक अजय सिंह, मेवाराम यादव आदि ने उपस्थित रहकर खेती की तकनीकी जानकारी प्राप्त की।
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