*महर्षि जन्म स्थली जीवापुर में स्मृति भवन का संकल्प-- वालजी भाई ढोलरिया* *ऋषि बोध उत्सव पर संकल्प**ब्यूरो मंड़ल प्रभारी सुरेश कनौजिया गोंडा*
ब्यूरो मंड़ल प्रभारी सुरेश कनौजिया गोंडा
12 मार्च 2022 प्रखर समाज सुधारक दयानंद सरस्वती के मूल जन्म स्थान ग्राम जीवापुर जिला मोरबी गुजरात में दयानंद स्मृति भवन बनाने का ग्रामजनों ने संकल्प किया है और दान दाताओ ने इस संकल्पको बहुत ही उत्साह के बढ़ाया हाल ही में बोध दिवस के पावन अवसर पर महाशिवरात्रि के दिन गांव में गाव वालो के सहयोग से एक महायज्ञ का आयोजन किया गया था जिसमे ट्रस्ट के सभी ट्रस्टी वालजीभाई ढोलरिया, जसमत भाई हापलिया, अजयभाई ढोलारिया, कानजी भाई लुनागरिया, नरसिंह भाई लुनागरिया, सरपंच कमलेशभाई निमावत, कांतीभाई मोलियां, बावजीभाई हापलिया, पार्थ ढोलरिया, विवेक लिंबासियां, पोपटभाई सहित के लोगों ने हाजरी दी थी और सबने मिल के निश्चय किया की गांव ने महर्षी जी का स्मृति भवन का निर्माण किया जाए।
ये सच बात है की दयानंदजी के जनस्थान की जगह आज भी मौजूद है और सन १९६७ से इधर आर्यसमाज मंदिर भी कार्यरत है। और अभी आने वाले समय में एक स्मृति भवन का भी निर्माण किया जाएगा। जीवापुर गाव मे कुबेरनाथ महादेवके मंदिर में महाशिवरात्रि के दिन बोध लेनेके बाद विश्व को वेदरूपी सत्यका ज्ञान दिया और राष्ट्रभक्ति की चेतना जगाई।
राष्ट्रीय शायर जवेर चंद मेघानी और अन्य कवियों ने जीवापुर गांव को स्वामीजी का जन्मस्थान बताकर गांव को महत्त्व बढ़ाया है। तभी जीवापुर गांव के मूल वतनी और हाल राजकोटमे रहने वाले वालजीभाई को विचार आया की वेद की ओर वापस बढ़े और वेदोका प्रसार प्रचार बढ़े इसलिए दयानंदजी के अपने वतन मे स्मृति भवन में उनकी यादोके अंश बचकर रहे और अंधश्रद्धा का नामोनिशान मिटे उनके लिए प्रयत्नशील रहे
शास्त्री विनोद आर्य ने कहा टंकारा में भी महर्षि का भव्य गुरुकुल एवं जन्म स्थाली संचालित है परंतु इतिहासकारों के अनुसार जीवापुर जन्म स्थान का उल्लेख है दोनों स्थान सन्निकट है युग प्रवर्तक महर्षि की जन्मस्थली पर स्मृति भवन का निर्माण युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत होगा
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