*एक जैसे काम करने वाले श्रमिकों के पारिश्रमिक अलग-अलग क्यों हाईकोर्ट ने पूछा**ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कुमार कनौजिया गोंडा*
ब्यूरो मंड़ल प्रभारी सुरेश कनौजिया गोंडा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आउट सोर्सिंग से श्रमिक सेवा मुहैया कराने के सभी शासनादेशों सहित पूरी योजना व नीति दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने दो सप्ताह में सरकारी अधिकारियों का व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है और पूछा है कि एक जैसे काम करने वाले श्रमिकों के विभिन्न जिलों में अलग-अलग पारिश्रमिक क्यों है।
कोर्ट ने कहा कि मॉडल सेवा नियोजक होने के नाते सरकार एक तरह के श्रमिकों की आउटसोर्सिंग सेवा लेने में पारिश्रमिक देने में विभेद नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि जवाबी हलफनामे में स्पष्ट किया जाए कि आउटसोर्स से सेवा के लिए सेवा प्रदाता द्वारा दिया जाने वाला न्यूनतम वेतन, नियोजन की मॉडर्न सेवा शर्ते अवकाश व छुट्टी की क्या नीति है।
यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी एवं न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने संयुक्त स्वास्थ्य आउटसोर्सिंग, संविदा कर्मचारी संघ की ओर से दाखिल याचिका की सुनवाई
• हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
• सभी शासनादेशों सहित पूरी योजना दाखिल करने का निर्देश
करते हुए दिया है। कोर्ट ने इससे पहले व्यक्तिगत हलफनामा मांगकर पूछा था कि समान काम पर दो जिलों में वेतन में अंतर क्यों है।
आउटसोर्सिंग पर रखे वार्ड ब्वाय व आया को साढ़े सात हजार रुपये प्रतिमाह वेतन, सप्ताह में सात दिन ड्यूटी और कोई छुट्टी नहीं होती। जीबी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन पर आउट सोर्सिंग से नियुक्ति में शोषण क्यों किया जा रहा है।
कोर्ट के आदेश पर सेवा प्रदाता कंपनी की ओर से दाखिल जवाब में मांगी गई जानकारी नहीं दी गई और राज्य सरकार ने जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया। कोर्ट ने राज्य सरकार को दो सप्ताह का अंतिम अवसर देते हुए पूरी स्कीम पेश करने का निर्देश दिया है।
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