*मृत्यु**सदैव शोक का विषय नहीं होता है। मृत्यु जीवन की पूर्णता है। स्वर कोकिला भारत रत्न लता दीदी की जीवन जितना सुंदर रहा उतना ही सुंदर उनकी**मृत्यु *हुई**ब्यूरो मंड़ल प्रभारी सुरेश कनौजिया/संवाददाता शिव कुमार कनौजिया गोण्डा*






ब्यूरो मंड़ल प्रभारी सुरेश कनौजिया/संवाददाता शिव कुमार कनौजिया गोण्डा

लता जी का शरीर पूरा हो गया। कल सरस्वती पूजा थी, आज माँ विदा हो रही हैं। लगता है जैसे माँ सरस्वती इस बार अपनी सबसे प्रिय पुत्री को ले जाने ही स्वयं आयी थीं।
मृत्यु सदैव शोक का विषय नहीं होती। मृत्यु जीवन की

पूर्णता है। लता जी का जीवन जितना सुन्दर रहा है,
उनकी मृत्यु भी उतनी ही सुन्दर हुई है। 93 वर्ष का इतना सुन्दर और धार्मिक जीवन विरलों को ही प्राप्त होता है। लगभग पाँच पीढ़ियों ने उन्हें मंत्रमुग्ध हो कर सुना है, और हृदय से सम्मान दिया है। उनके पिता ने जब अपने अंतिम समय में घर की बागडोर उनके हाथों में थमाई थी, तब उस तेरह वर्ष की नन्ही जान के कंधे पर छोटे छोटे चार बहन-भाइयों के पालन की जिम्मेवारी थी। लता जी ने अपना समस्त जीवन उन चारों को ही समर्पित कर दिया। और आज जब वे गयी हैं 
तो उनका परिवार भारत के सबसे सम्मानित प्रतिष्ठित परिवारों में से एक है। किसी भी व्यक्ति का जीवन इससे अधिक सफल क्या होगा?

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