*फांसी के समय बढ़ गया था लहिडी का वजन**ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौजिया/नगर संवाददाता शिव कुमार कनौजिया गोण्डा*
ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौजिया/नगर संवाददाता शिव कुमार कनौजिया गोण्डा
गोंडा आर्य समाज के पुरोहित एवं अंतर्राष्ट्रीय वैदिक प्रवक्ता आचार्य पंडित विमल कुमार आर्य (हरदोई) ने बताया की शहीद राजेंद्र नाथ लाहिडी ने 17 दिसंबर 1927 को फांसी के पूर्व जेलर से उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि मैं मरने नहीं आजाद भारत में पुनर्जन्म लेने जा रहा हूं मुझे विश्वास है कि मेरा बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा लाहिडी जी का जन्म 23 जून 1901 ई० बांग्लादेश के पावना जिला ग्राम मोहनपुर में क्षितिज मोहन माता वसंतकुमारी के यहां हुआ इनके पिता बनारस में नौकरी करते थे 8 वर्ष की आयु से ही वाराणसी में पालन पोषण शिक्षा दीक्षा हुआ उस समय वाराणसी क्रांतिकारियों का प्रमुख केंद्र होने के नाते एवं क्रांतिकारियों की प्रेरणा स्रोत ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश से प्रेरित क्रांतिकारी सचिंद्र सान्याल से हुई रिपब्लिकन पार्टी की सदस्यता के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने लगे अंग्रेजों से लड़ने के लिए ब्रिटिश माउजर खरीदने हेतु पैसे का प्रबंध के लिए ग्रुप के ठाकुर रोशन सिंह अशफाक उल्ला खा राम प्रसाद बिस्मिल के साथ गुप्त मंत्रणा अनुसार 9 अगस्त 1925 को काकोरी रेलवे स्टेशन लखनऊ के पास ट्रेन पर लदा सरकारी खजाने लूटा परंतु शिनाख्त पर गिरफ्तारी व मुकदमा लखनऊ जज हेल्टन द्वारा इन चारों क्रांतिकारियों को फांसी की सजा 19 दिसंबर 1927 को मुकर्रर की और चारों को अलग-अलग जनपदों में भेज दिया परंतु गोण्डा भी क्रांतिकारियों का गढ़ होने के कारण गोंडा में बंद राजेंद्र नाथ लाहिड़ी को फांसी मुकर्रर तिथि से 2 दिन पूर्व 17 दिसंबर 1927 को फासी पर लटका दिया
लाहिडी जी नित्य की तरह भोर मे संध्या, ईश्वरस्तुति उपासना का पाठ व्यायाम किया तब जेलर ने कहा कि तुम कुछ समय के मेहमान हो यह सब क्यों कर रहे हो तब उन्होंने कहा मैं मरने नहीं जा रहा बल्कि मै भारत को आजाद कराने के लिए भारत में पुना जन्म लेने जा रहा हूं उस समय वजन किया गया तो 5 पाउंड अधिक निकला जेलर ने अंतिम इच्छा जानना चाहा तो लाहिड़ी ने कहा तुम लोग हमारी अंतिम इच्छा पूर्ण नहीं कर सकते इसलिए जब मुझे फांसी पर लटकाया जाए तो बाहर खड़े देशभक्तों से कहो की इतनी जोरों से वंदे मातरम का उद्घोष हो कि हमारे कानों में उस समय आवाज वंदे मातरम का ही सुनाई दे। इस प्रकार फांसी के उपरांत उनके पार्थिव शरीर को आर्य समाज के महाशय छोटेलाल स्वामी प्रसाद गुरहा ईश्वर शरण एवं लाहिडी के परिजन जेल से 500 मीटर लगभग दूरी पर बूचड़ घाट पर अंतिम संस्कार किया गया महाशय छोटे लाल का घर क्रांतिकारियों का गुप्त मंत्रणा का केंद्र रहा अंतिम संस्कार के तीसरे दिन ईश्वर शरण एवं छोटे लाल जी के नेतृत्व में आर्य समाज राधाकुंड परिसर तिराहे पर शांतियज्ञ परिजनों के साथ मिलकर किया गया।इस प्रकार आर्य समाज के लोग हर वर्ष शांतियज्ञ स्थल को लाहिडी प्रेरणा स्थल के रूप में विकसित हुए हैं और उनकी याद में प्रत्येक वर्ष 17 दिसंबर को प्रातः 8बजेयहीं से प्रभातफेरी होते हुए लाहिड़ी चौराहा होते हुए जेल में फांसी स्थल पर पहुंच कर आर्य समाज जिला सभा के नेतृत्व में यज्ञ के माध्यम से श्रद्धांजलि दी जाती है यज्ञ के मुख्य यज्ञमान जनपद न्यायाधीश होते हैं यह परंपरा भी आर्य समाज ने डाली है इसके लिए कई दशकों पूर्व शासन प्रशासन मांग ने मान्यता दी आज 13 दिसंबर 2021 को माननीय जिलाधिकारी महोदय की बैठक में लाहिड़ी जी का 95वे शहीद दिवस 17 दिसंबर 2021 को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन आर्य समाज एवं स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के सहयोग से फांसी स्थल पर मनाए जाने की कार्रवाई पूर्ण की गई बैठक में शास्त्री विनोद आर्य ने इसअमृत महोत्सव वर्ष पर स्वतंत्रता सेनानी एवं उनके आश्रितों को सम्मानित करने हेतु प्रस्ताव पास कराया।
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