*क्रषी क़ानूनों को वापस लेने का निर्णय चुनावों में हार के भय से लिया गया**यह किसान आंदोलन की जीत और सरकार के दंभ की पराजय है: भाकपा**ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौजिया गोण्डा*



ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौजिया गोंडा

लखनऊ- 19 नवंबर 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने प्रधानमंत्री द्वारा तीन क्रषी क़ानूनों को वापस लेने की घोषणा को किसान आंदोलन की बड़ी जीत और अहंकारी, तानाशाह एवं कार्पोरेटपरस्त मोदी सरकार की बड़ी हानि बताया है।
एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि अभी आंदोलन के कई मुद्दे हैं जिन पर सरकार को ठोस कदम उठाने हैं। तीनों क़ानूनों को संसद में रद्द करने के अलावा किसानों की उपजों की सही कीमत और सम्पूर्ण खरीद संबंधी एमएसपी कानून बनाना शेष है। साथ ही बिजली बिल 2020 को रद्द करने और लखीमपुर किसान- पत्रकार हत्याकांड के प्रायोजक केन्द्रीय ग्रहमंत्री को हटाने, 700 से अधिक किसानों की शहादत को सम्मान और उनके परिजनों को पर्याप्त मुआबजे का प्रश्न भी लंबित है। श्रमिकों के अधिकारों वेतनों और अन्य देयों में कटौती रद्द कराने, बेरोजगारों को रोजगार, पुरानी पेंशन बहाली, महंगाई को नीचे लाने और लोकतान्त्रिक क्रियाओं पर दमन जैसे मुद्दे भी लंबित पड़े हैं।
भाकपा ने कहाकि केन्द्र सरकार का यह निर्णय 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा की करारी हार के भय से बेहद देर से उठाया गया कदम है। प्रधानमंत्री आज भले ही सदाशयता का नाटक कर रहे हैं लेकिन सभी जानते हैं उन्होने, उनकी सरकार और पार्टी भाजपा ने लोकतान्त्रिक आंदोलनों को कुचलने को कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी। 
दिल्ली आरहे किसानों की राह में अवरोध खड़े किये, आंदोलन स्थल पर बाड़ें लगवाईं, कीलें ठोकीं, आँसू गैस, पानी और रबर बुलेट से प्रहार किये, उन्हें खालिस्तानी बताया, आन्दोलनजीवी बता कर उनका मज़ाक उड़ाया, उन पर लखीमपुर में बुलडोजर चढ़वा कर हत्यायेँ कीं और प्रधानमंत्री ने आज तक उनकी शहादत पर दो शब्द तक नहीं बोले। सीएए, एनआरसी विरोधी आंदोलनों पर दमनचक्र और जगह जगह पर विपक्ष के आंदोलनकारियों को देशद्रोह जैसे आरोपों में गिरफ्तार कराया। 
किसान आंदोलन ने लोकतांत्रिक आंदोलनों के लिये रास्ता हमवार किया है और लोकतन्त्र की रक्षा की है। इस महान आंदोलन को वोटों के लिये किसी के भी द्वारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। भाकपा शुरू से ही चट्टान की तरह आंदोलन के साथ खड़ी है और आगे भी खड़ी रहेगी। आगामी आंदोलन के संबंध में संयुक्त किसान मोर्चा के फैसले का इंतिज़ार रहेगा। 
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा , उत्तर प्रदेश

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