*देर रात तक दौड़ता रहा घायल पीड़ित और बहता रहा खून,बेलगाम कौड़िया पुलिस ने नहीं लिखा मुकदमा**यह है जिले के तेजतर्रार कहे जाने वाले कप्तान की बेदर्द मित्र पुलिस* *ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौजिया/प्रमुख संवाददाता खुशबू कनौजिया गोंडा*
ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौजिया/प्रमुख संवाददाता खुशबू कनौजिया गोंडा
गोंडा कर्नलगंज जिले के पुलिस कप्तान संतोष कुमार मिश्र जहां एक ओर अपराधियों पर लगाम लगाने के दावे करते हुए कानून व्यवस्था चुस्त दुरुस्त रखने के क्रम में अपराधियों पर लगातार कार्रवाई करने की बात कर रहे हैं। वहीं उनके अधीनस्थ कई ऐसे थाना एवं चौकी प्रभारी व दीवान हैं जो काफी समय से एक ही थाने में जमे रहकर कप्तान के निर्देशों पर पानी फेर रहे हैं और अपराधियों के हौंसले को बढ़ावा दे रहे हैं। यही नहीं जिले में कुछ थाने है ऐसे हैं जहां पर थानाध्यक्ष की नहीं मुकदमा लिखने वाले दीवान की ही मनमर्जी चलती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार ताजा मामला थाना कौड़िया बाजार से जुड़ा है। जहां मिली जानकारी के मुताबिक ठड़वरिया के रहने वाले दिनेश कुमार बाजपेई पुत्र ननकऊ बाजपेई द्वारा गांव के ही ननकू दूबे पुत्र भगवती से बच्चे के विवाद को लेकर शुक्रवार को विवाद हो गया था। शाम करीब पांच बजे जब दिनेश अपने घर मजदूरी करके पहुंचा तो पहले से ही घात लगाए बैठे ननकू दूबे ने गाली गुप्ता देते हुए दिनेश के घर में घुसकर मारपीट कर घायल कर दिया जिससे उसके आंख के ऊपर काफी चोटें आई हैं।जिससे पीड़ित ने पहले तो डायल 112 पर सूचना दिया उसके बाद आर्य नगर चौकी पर पहुंचकर प्रार्थना पत्र दिया तो आर्य नगर चौकी प्रभारी ने लीपापोती करते हुए थाने पर जाने को कहा जब पीड़ित थाने पहुंचा तो वहां पर सादी वर्दी में मौजूद दीवान ने बताया कि चौकी पर जाओ तब तुम्हारा मुकदमा लिखा जाएगा। पीड़ित कई बार चौकी और थाने का चक्कर लगाता रहा और उसके सिर से खून टपकता रहा लेकिन उसका मुकदमा देर रात तक नहीं लिखा गया।जबकि बेहद शर्मनाक और हैरतअंगेज तथ्य यह है कि जिस व्यक्ति को चोट लगी है और वह लगातार चौकी और थाने का चक्कर लगाता रहा वहीं कप्तान के निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए पुलिस कर्मी मामले में लीपापोती करते रहे। इससे जिले के काफी तेजतर्रार कहे जाने वाले पुलिस कप्तान संतोष मिश्रा के अधीनस्थ खुद को मित्र पुलिस कहलाने वाले बेलगाम पुलिसकर्मियों का अमानवीय चेहरा तो सामने आया ही वहीं पुलिस विभाग की पीड़ितों के प्रति अपनाये जा रहे व्यवहार का खुलासा करते हुए पुलिसिया कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा कर रहा है। आखिर जिले की पुलिस मित्र पुलिस कब साबित होगी इसका जवाब शायद कप्तान ही दे सकते हैं।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें