कम्युनिस्ट क्या चाहते है,,,,, मुनेश त्यागी
ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौंजिया गोंडा
आजकल दिल्ली में किसान आंदोलन जोरों पर है, सरकार इसे कभी खालिस्तानियों का आंदोलन बताती है, कभी इसमें पाकिस्तान और चीन का हाथ बताती है कभी नक्सलवादियों और कम्युनिस्टों का आंदोलन बताती है। आज हम यहां जानना चाहेंगे और विचार करेंगे कि आखिर ये कम्युनिस्ट कौन लोग हैं और यह क्या चाहते हैं? क्योंकि कम्युनिस्टों को लेकर समाज में पूंजीपति वर्ग ने उनको बदनाम कर रखा है उनके विषय में गलत गलत धारणाएं फैला रखी हैं।
दरअसल कम्युनिस्ट किसानों, मजदूरों, बुद्धिजीवियों और मेहनतकशों के बेटे बेटियां हैं। ये उन मेहनतकशों के बेटे हैं जो इस दुनिया में, इस देश में हजारों साल पुराने शोषण, जुल्म, अत्याचार, भेदभाव गैरबराबरी को खत्म करना चाहते हैं। वे हजारों साल पुरानी गरीबी, मुफलिसी,शव शोषण, अन्याय गैरबराबरी औरभेदभाव की शासन व्यवस्था का खात्मा चाहते हैं। शोषकों, अन्यायियों, भेदभाव करने वालों की शासन व्यवस्था को खत्म करना चाहते हैं। वे किसानों मजदूरों की राजसत्ता काम करना चाहते हैं।
कम्युनिस्ट सबको रोटी, कपड़ा, मकान, सबको शिक्षा, सब को रोजगार, सबको स्वास्थ्य, सब की सुरक्षा, सब को बिजली पानी और सबका विकास करना चाहते हैं। वे जनवाद, धर्मनिरपेक्षता, गणतंत्र और समाजवादी व्यवस्था काम करना चाहते हैं उनके उद्देश्य हैं जनता की मुक्ति,,,,, शोषण से मुक्ति, अन्याय से मुक्ति, भेदभाव से मुक्ति, गैरबराबरी से मुक्ति, गरीबी भुखमरी से मुक्ति,छोट बडाई और ऊंच-नीच की सोच और मानसिकता से मुक्ति, अमीरी गरीबी की लगातार बढ़ती खाई से मुक्ति।
कम्युनिस्ट लोग सारी जनता को जातिवाद, सांप्रदायिकता,क्षेत्रवाद और जनविरोधी पूंजीवाद से मुक्ति दिलाना चाहते हैं। वे भ्रष्टाचार, महंगाई, दबंगई से मुक्ति चाहते हैं, झूठ कपट और मक्कारी का खात्मा चाहते हैं। अंधविश्वासों,धर्मांता और श्रद्धांधता से मुक्ति चाहते हैं।कम्युनिस्ट मानते हैं कि सारा धन, दौलत, धरती सबके हैं, प्रकृति की देन पर सबका बराबर अधिकार है और उसका इस्तेमाल सारी जनता के कल्याण के लिए होना चाहिए
कम्युनिस्ट सबको सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना चाहते हैं, सब को पर्याप्त अवसर मुहैया कराना चाहते हैं, सब को इंसाफ, भाईचारा अमन-चैन कायम करना चाहते हैं, सबको आर्थिक सामाजिक राजनीतिक सांस्कृतिक आजादी मोहिया कराना चाहते हैं, गरीबी पिछड़ापन और अभावग्रस्ता का खात्मा चाहते हैं। सब तरह की महंगाई और बेरोजगारी का खात्मा चाहते हैं हमारे देश के सभी नौजवानों को रोटी कपड़ा मकान शिक्षा रोजगार चाहते हैं। वे सबको मुफ्त, अनिवार्य और वैज्ञानिक शिक्षा की व्यवस्था कायम करना चाहते हैं, वे सब को मुफ्त और आधुनिकतम इलाज और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना चाहते हैं।
कम्युनिस्ट सबको बुढ़ापे की पेंशन की व्यवस्था करना चाहते हैं, समता समानता भाईचारा की स्थापना करना चाहते हैं, प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल सारी जनता के विकास के लिए चाहते हैं।वे हजारों साल पुराने कृषि संकट का खात्मा चाहते हैं, जमीन जोतने वाले को मिलनी चाहिए, ऐसा मानते हैं।
सभी बूढों को 10000 रु मासिक पेंशन मिलनी चाहिए, हरेक खाली हाथ को काम और बेरोजगारी भत्ता देना चाहते हैं, किसानों को फसलों का वाजिब दाम देना चाहते हैं। किसानों को उनकी हर फसल का एमएसपी मिलना चाहिए, इसकी बात करते हैं। वे सभी प्रकार के भेदभाव और ऊंच-नीच का खात्मा चाहते हैं, ऊंच-नीच और छोट बडाई की सोच और मानसिकता को खत्म करना चाहते हैं। इस भ्रष्टाचारी और अत्याचारी निजाम को खत्म करना चाहते हैं, सबको शिक्षा सबको काम सब को सुरक्षा सबको इलाज उनका नारा है।
पूरी दुनिया में वैश्विक भाईचारा हो वैश्विकबंधुत्व हो, वसुधैवकुटुंबकम, एकता, सदाचार,मैत्री का वातावरण हो, ऐसा वे चाहते हैं।वर्ग विहीन और समाजवादी व्यवस्था की स्थापना करना चाहते हैं। वे वैज्ञानिक संस्कृति तर्कवादी, तार्किकतावादी संस्कृति की स्थापना करना चाहते हैं। सब लोग मिलकर रहेंगे, सब के दुख दर्द में शामिल होंगे, चारों तरफ भाईचारे की सुगंध आएगी, चारों तरफ न्याय बराबरी समानता का साम्राज्य होगा, ऐसा समाज कायम करना चाहते हैं। वह सारी जनता का, सारे विश्व का कल्याण जाते हैं। वे सत्ता का इस्तेमाल धन दौलत कमाने के लिए नहीं बल्कि जनता का कल्याण करने के लिए चाहते हैं। वे जनता के सबसे बड़े मित्र हैं। मैं एक ऐसी ही व्यवस्था का मुरीद हूं और पूरी जिंदगी ऐसी ही व्यवस्था की स्थापना के अभियान में लगा रहना चाहता हूं।
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