*भारत बचाओ मिशन के तहत कांग्रेस ने किसानों की समस्याओं को लेकर धरना देकर सांसद प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा*
ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौंजिया गोण्डा
गोंडा। भारत में किसानों की बढ़ती समस्या का कारण क्या है इसे समझने की आवश्यकता है बिना कारण जाने उसके निवारण की बात करना सही नहीं हो सकता है
जब किसानों द्वारा उत्पादित गेहूं और चावल का मूल्य एक रूपए प्रति किलो था तब भारत के राष्ट्रपति का वेतन दस हजार रुपए प्रति माह था उसी के अनुसार ऊपर से नीचे तक सभी के वेतन और सुविधाएं प्रदान किया जा रहा था।
वर्तमान समय में भारत के राष्ट्रपति का वेतन पांच लाख रुपए प्रति माह हो गया है और उसी के अनुसार अन्य तमाम तरह की सुविधाएं प्रदान किया जा रहा है।
उसी के अनुसार ही नीचे तक सभी वेतन भोगियों को वेतन-भत्ता दिया जा रहा है।
अब प्रश्न यह उठता है कि क्या जिस तरह से वेतन और सुविधाओं में लगातार बृदधि किया गया है क्या उसी के अनुसार किसानों द्वारा उत्पादित गेहूं चावल सहित अन्य तमाम तरह के उत्पादित होने वाले फसलों के मूल्य निर्धारण किया गया है।
जिस प्रकार से सभी लोगों के वेतन और सुविधाएं बढ़ा दिया गया है क्या उसी के अनुसार मूल्य निर्धारण किया गया होता तो किसानों को पचास या साठ रुपए प्रति किलो गेहूं और चावल सहित अन्य तमाम तरह के उत्पादों का मूल्य निर्धारण किया जाना चाहिए था।
ऐसा न करना ही किसानों के साथ धोखा किया गया है
दूसरी तरफ गम्भीरता पूर्वक बिचार करेंगे तो आप को समझ में आ जाएगा कि सच्चाई क्या है
किसानों के फसलों के उत्पादन में प्रयोग किया जाने वाला खाद बीज कीटनाशक दवाओं डीजल इंजन ट्रैक्टर ट्राली सहित अन्य तमाम तरह से प्रयोग होने वाले सभी संसाधनों पर भारी टैक्स भी लिया जा रहा है।
इसके अलावा किसानों के फसल उत्पादन में प्राकृतिक प्रकोपों का प्रभाव रहता है जैसे बाढ़ सुखाड़ ओले पत्थर तेज गर्मी तेज हवाओं तरह तरह के कीड़े मकोड़े आदि से फसलों को छति हो जाता है।
अब प्रश्न यह है कि महंगे सामानो को लगाकर किसानों को अपने उसके अनुसार मूल्य निर्धारण नहीं किया जा रहा है इसके अलावा जो मूल्य निर्धारण किया गया है उसके अनुसार भी सरकारी खरीद करने के बजाय बिचौलियों के द्वारा सरकारी खरीद करके किसानों को और बर्बाद करने पर आमादा हो गये है।
इसके लिए देश के सभी सत्ता और बिपक्ष दोनों जिम्मेदार है।
लगभग तीस साल से किसानों ने आत्महत्याएं किया है और कर्ज चुकाने में नाकाम हो जाने पर किसानों ने आत्महत्याएं किया है।
इसके लिए देश के राजनैतिक दलों ने कभी गम्भीरता से नहीं लिया है और देश के किसानों को धोखा देने पर आमादा हो गये थे
देश के राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति करने के लिए जनता को लूटने ठगने और धोखा देने का कार्य किया है और जनता को जाति धर्म अगड़ा पिछड़ा दलित हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई बौद्ध आदि मन्दिर मस्जिद छेत्र वाद आदि नफरत का बीज बोकर देश के समबिधान बिरोधी राष्ट्र विरोधी आचरण करके किसानों को बांटने और अपने स्वार्थ सिद्ध करने में लगे हुए हैं।
वर्तमान समय में ईवीएम मशीन से बेईमानी से सत्ता हासिल करने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एंड कंपनी जो संघ प्रमुख मोहन भागवत एंड कंपनी के राष्ट्र विरोधी एजेंडे को लागू करने पर आमादा हैं और देश को लूटने ठगने और धोखा देने के लिए तैयार हैं।
इसीलिए किसानों को बर्बाद करने के लिए तीन काले कानूनों को मनमानी तौर पर लागू करने पर आमादा हैं।
अब देश के लोगों की नैतिक जिम्मेदारी आ चुकी है कि भारत को बचाने और भारतीय संविधान लोकतंत्र और मानवता की रक्षा करने के लिए जाति धर्म अगड़ा पिछड़ा दलित हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई बौद्ध आदि आपसी दुर्भावना को त्याग कर किसानों के आंदोलन को तेज करें सफलता निश्चित तौर पर मिलेगी।
किसानों द्वारा चलाए जा रहे आन्दोलन सिर्फ किसानों का आंदोलन नहीं है यह आन्दोलन भारत को बचाने और भारतीय संविधान लोकतंत्र और मानवता की रक्षा करने के साथ ही देश के लोगों के अधिकारों और आजादी को बचाने का आन्दोलन है।
इसके समर्थन में पूरा देश खड़ा हो गया है और देश के अन्य तमाम लोग जो भ्रमित हैं उन्हें भी अपने अधिकारों और आजादी की रक्षा करने के लिए किसानों के आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा करके पीएम नरेंद्र मोदी एंड कंपनी के काले कारनामों को उजागर करने के लिए तैयार हो जाएं क्योंकि यह सभी पाखंडी बेईमान मक्कार और गद्दार मानसिकता के लोग भारत को बर्बाद करने पर आमादा हैं।
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