*जनसूचना अधिकार 2005 के अंर्तगत विभिन्न विषयों पर मांगी गई सूचना न देने पर उत्तर प्रदेश सूचना आयोग ने देवीपाटन मंडलायुक्त पर 25 हजार रुपये का जुर्माना किया है*


  ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौंजिया गोण्डा

गोण्डा। जनसूचना अधिकार 2005 के अंर्तगत विभिन्न विषयों पर मांगी गई सूचना न देने पर उत्तर प्रदेश सूचना आयोग ने देवीपाटन मंडलायुक्त पर 25 हजार रुपये का जुर्माना किया है। जुर्माने की राशि आयुक्त के वेतन से काटने का भी आदेश कोषागार को दिया है।
मालूम हो कि दो वर्ष पूर्व कुमारी मोनू कनौजिया ने जनसूचना अधिकारी कार्यालय आयुक्त देवीपाटन मण्डल से सूचना मांगा था। कुमारी मोनू कनौजिया ने राज्य सूचना आयोग उत्तर प्रदेश में अपील की जिसमें उसने कहा कि 20 जून 2017 को जन सूचनाधिकार कार्यालय आयुक्त देवीपाटन मडल गोंडा से सूचना मांगी थी। इसी क्रम में उसने 2 अगस्त 2017 को   अपीलीय अधिकारी के समक्ष प्रथम अपील प्रस्तुत की थी। सूचना न मिलने पर 3 अक्टूबर 2017 को उत्तर प्रदेश सूचना आयोग में एक वाद किया। 13 अगस्त 2019 को आयोग के समक्ष वादिनी ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि सूचना नहीं उपलब्ध करायी गयी है।
इस पर आयोग ने फिर नोटिस जारी करते हुए सूचना उपलब्ध कराने का आदेश दिया। 3 दिसम्बर 2019 को आयोग के समक्ष वादिनी ने पुनः अपना पक्ष  रखा और सूचना न देने की दलील दी। इस पर आयोग ने दस हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए 15 दिनों में सूचना उपलब्ध कराने का आदेश जारी किया था।
राज्य सूचना आयोग ने देवी पाटन के आयुक्त को   सूचना आयोग के समक्ष 2 जून 2018, 25  नवम्बर 2019 और 31 जनवरी 2020 को उपस्थित होने के लिए नोटिस दिया था। इसके बाद भी आयोग के समक्ष कोई उपस्थित नहीं हुआ। इस पर आयोग ने 3 दिसम्बर 2020 को दस हजार रुपये जुर्माने की राशि को बढ़ाते हुए 25 हजार रुपये कर दिया। इसके साथ ही जुर्माने की रकम आयुक्त के वेतन से काटने का आदेश कोषागार को दिया है।

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