विकास का सपना*November 30, 2020*


ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौंजिया गोण्डा
  • तीन वर्ष बाद भी स्वच्छ भारत अभियान के तहत निर्मित शौचालय अपूर्ण

  • हैंडपंप रिबोर के नाम पर भी लाखों रुपए हजम कर हो गए मालामाल

  • किसानों को पता ही नही समतलीकरण के नाम पर लाखों रुपए जेब मे चले गए

  • ग्राम पंचायतों में सबसे बड़ा घपला घोटाला राज्य वित्त और केंद्र वित्त योजनाओं में

  • ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायत जिलाधिकारी कार्यालय में फांक 

गावो और गरीबो का समुचित विकास का सपना सचिव और ग्राम प्रधानों की खाऊ कमाऊ नीति के चलते चकनाचूर हो रहा है।प्रदेश में जब से भाजपा की सरकार बनी है केंद्र और प्रदेश सरकार ने खजाना का मुंह खोल दिया है।गावो के विकास के लिए अन्य विभागों के मद को सीधे ग्राम पंचायतों के खाता से जोड़ दिया।गावो का समुचित विकास तो नजर नही आ रहा है किंतु ग्राम प्रधान और सचिव विकास के मद में भेजी गई धनराशि को हजम कर मालामाल हो गए।गावो और गरीबो के विकास के लिए पिछली सरकारों ने जितना धनराशि 20 वर्षो में नही खर्च की उतनी धनराशि महज तीन वर्षों में खर्च हो गई किन्तु विकास का दावा खोखला नजर आ रहा है।गावो के विकास के लिए चलाई जा रही महत्वपूर्ण योजनाओं की जमीनी हकीकत पर नजर डाले तो नजारा ऐसा ही देखने को मिलेगा।
देश की बागडोर संभालते ही प्रधानमंत्री मोदी ने गावो में निवास कर रहे महिलाओ और पुरुषों को खुले में शौच से मुक्ति दिलाने और गांवों व आसपास को साफ सुधरा रखने के स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत किया।खुले में शौच से मुक्ति दिलाने के लिए शौचालय का निर्माण युद्ध स्तर पर शुरू किया गया।शौचालय निर्माण के लिए ग्राम पंचायतों के खाता में लाखों रुपये की धनराशि भेजी गई।
ग्राम प्रधानों ने शौचालय की धनराशि लाभार्थियों के खाता में न भेजकर स्वयं ठेकेदार बन गए और गांवों में शौचालय निर्माण का काम शुरू करा दिया।किसी लाभार्थी को ईंट दिया,तो किसी को सीमेंट तो किसी के घर पर कॉकपिट खोदवा दिया।तीन वर्ष बाद भी गांवों में ग्राम प्रधानों द्वारा स्वच्छ भारत अभियान के तहत निर्मित शौचालय अपूर्ण है और महिला और पुरूष खुले में शौच करने के लिए बिबश है।
ऐसा नही है कि सरकार ने योजनाओं के देखरेख के लिए कुछ नही किया।समिति बनाई,स्वैक्षा ग्राहियों की तैनाती की किन्तु ये लोग भी इस भ्रस्टाचार के सहभागी बन गए और इनके द्वारा लगाई गई रिपोर्ट पर विश्वास कर सरकार ने गावो को खुले में शौच से मुक्ति का तमगा दे दिया और सभी गांवों को संतृप्त कर दिया।
गावो की मुख्य सड़के, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर रात के समय अंधेरा न रहे सरकार ने सोलर लाइट व बिजली के खंभों पर स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए भारी भरकम धनराशि जारी की।सोलर लाइट खरीद बाजार भाव से कई गुना ज्यादा में किए गए यही नही बिजली के खंभों पर बिना स्ट्रीट लाइट लगाए ही भुगतान ले लिया गया।गावो में उजाला तो नही फैला हां अधिकारी, सचिव व ग्राम प्रधान का जीवन प्रकाशमान हो गया।
ग्रामवासियों को पानी की किल्लत न हो जलनिगम बिभाग के धनराशि को सीधे ग्राम प्रधान के खाता से जोड़ दिया गया।सरकार की मंशा थी कि हैंडपंप खराब होने पर सचिव और ग्राम प्रधान तुरंत इसका हल निकाल देंगे।ग्राम प्रधानों और सचिवो ने इंडिया व देशी हैंडपंप मरम्मत व रिबोर के नाम पर भी लाखों रुपए की धनराशि हजम कर मालामाल हो गए।
किसानों के उभड़ खाबड़ जमीनों को खेती के लायक बनाने के भूमि संरक्षण बिभाग और कृषि विभाग के योजनाओं को सीधे ग्राम पंचायतों को दे दिया गया।किसानों को पता ही नही है हां उनके जमीनों के समतलीकरण के नाम पर लाखों रुपए जेब मे चले गए।
ग्राम पंचायतों में सबसे बड़ा घपला घोटाला राज्य वित्त और केंद्र वित्त योजनाओं में भेजी गई धनराशि में किया गया।इस योजना के तहत टूटे फूटे सरकारी भवन,नालियों,सड़को समेत अन्य की मरम्मत पर खर्च किया जाना था।केंद्र और प्रदेश सरकार ने भारी भरकम राशि इस मद में जारी किया।ऐसा कोई ग्राम पंचायत नही है जहाँ इस मद का दुरुपयोग नही किया गया है।
यह मद ग्राम प्रधानों व सरकारी कर्मचारियों के लिए सबसे मुफीद साबित हुआ।इस मद में आई धनराशि को फर्जी बिल बाउचर लगाकर गबन कर लिया गया।इस योजना की धनराशि का भुगतान बिना काम किये ही हो गया।उदाहरण समझे,गांव में पूर्व में महज दो खड़ंजा व दो ही नाली बनाई गई थी।अब इसी नाली व खड़ंजे को कभी इस तरफ से तो कभी उस तरफ से दिखाकर हर वर्ष लाखो रुपये का फर्जी भुगतान ले लिया गया।इस मद की धनराशि ग्राम प्रधानों व कर्मचारियों के लिए सबसे मुफीद माना गया है।
ऐसा नही है कि उक्त धनराशि और योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायत ग्रामीणों ने नही किया।जिलाधिकारी, आयुक्त,सचिव,प्रमुख सचिव के साथ ही मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायतों पर जांच तो की गई किन्तु जांच के बाद बिधिक कार्यवाही नही किया गया।जिसके चलते ग्राम प्रधानों और सचिवो के हौसले बुलंद हो गए और उक्त दोनों मिलकर योजनाओं को खुलकर लूटने लगे।अम्बेडकरनगर जनपद के ब्लॉक जलालपुर के दर्जनों ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायत जिलाधिकारी कार्यालय में धूल फांक रही है।हां जांच व कार्यवाही तो नही की गई हाँ शिकायतकर्ताओ के जान की नौबत आ गई।
भ्रस्टाचार व पारदर्शिता के बल पर केंद्र व प्रदेश में आई भाजपा सरकार भ्रस्टाचार रोकने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है।पारदर्शिता का दावा अंधरे में गुम हो गया।हां महज तीन हजार रुपये मानदेय पाने वाला ग्राम प्रधान व लगभग 40 हजार वेतन पाने वाला सचिव महज तीन वर्षों में कई ट्रको समेत अकूत सम्पति का मालिक बन गया।

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