*उत्तर प्रदेश के वामदलों ने राष्ट्रपति से की अपील**उत्तर प्रदेश में लोकतांत्रिक आंदोलनों को कुचलने की राज्य सरकार की करतूतों पर रोक लगायें**दिल्ली पहुंच रहे किसानों के साथ किये जा रहे अमानुषिक वर्ताव को तत्काल रोका जाये**रद्द हों किसान विरोधी काले कानून*



ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौंजिया गोण्डा
लखनऊ 28 नवंबर,  उत्तर प्रदेश के चार प्रमुख वामपंथी दलों ने उत्तर सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने तुष्टिकरण और वोटों की राजनीति के तहत कोविड नियमों को दरकिनार कर भारी भीड़भाड़ वाले तमाम आयोजनों को खुली छूट दे दी है, वहीं वामपंथी दलों और तमाम जनवादी संगठनों द्वारा कोविड नियमों का अनुपालन करते हुये जनहित में किये जा रहे कार्यक्रमों पर कहर बरपा रही है। वामदलों ने सरकार की इस तानाशाही नीति पर कड़ी नाराजगी जताई है।

प्रदेश के चारों वामदलों के शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिये गये निर्णय के तहत उपर्युक्त संदर्भ में आज वामपंथी दलों- भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) एवं अखिल भारतीय फारवर्ड ब्लाक के राज्य स्तरीय नेताओं के एक प्रतिनिधि मण्डल ने किसानों द्वारा किये जा रहे आंदोलन के समर्थन में और उन पर किये जा रहे अत्याचारों के खिलाफ  राजभवन जाकर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल महोदया के यहां राष्ट्रपति के नाम सम्बोधित ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में कहा गया है कि नये कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली आ रहे किसानों के साथ पुलिस प्रशासन जो रवैया अख्तियार कर रहा है, वह बेहद आपत्तिजनक, चिंताजनक, अमानवीय, अनुचित और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। कोरोना महामारी और ठंड के समय में उन पर पानी की बौछार तथा आंसू गैस के गोलों की बारिश की जा रही है। उनके साथ पुलिस आतंकवादियों जैसा व्यवहार कर रही है। 

कृषि कानूनों को लेकर किसानों की आशंकाएं और आक्रोश जायज है,  जिसके तहत उन्होंने दिल्ली पहुंचने का निर्णय लिया है। लेकिन भाजपा सरकार उनसे आतंकवादियों जैसा बर्ताव कर रही है।

ज्ञापन में वामदलों ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में कोरोना महामारी सम्बन्धी नियमों का पालन करते हुए जनता की समस्याओं पर शांतिपूर्ण तरीके से जो धरने-  प्रदर्शन किये जा रहे हैं उन तक पर रोक लगायी जा रही है। यहां तक कि पर्चे बांटने पर भी पुलिस गिरफ्तार कर रही है। अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन किया जा रहा है। वामदलों ने राष्ट्रपति को कहा कि इस मामले में हम आपका हस्तक्षेप जरूरी समझते हैं।

वामदलों ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वे अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देशित करें कि वह शांतिपूर्ण तथा नियमानुसार जनता की समस्याओं को लेकर लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत धरना, प्रदर्शन, सभा, पर्चा वितरण आदि कार्यवाहियों को पुलिस के बल पर रोकने, आंदोलनकारियों को गिरफ्तार करने और आंदोलनों को कुचलने का काम न करे।

हमारी यह भी मांग है कि केन्द्र सरकार किसानों की जायज चिंताओं को सम्बोधित करे। एमएसपी को कानूनन अनिवार्य बनाया जाय और कृषि व किसान विरोधी सभी कानूनों को वापस लिया जाय, वामदलों ने ज्ञापन में कहा है।
प्रतिनिधि मण्डल में भाकपा (मा.) के राज्य सचिव डा0 हीरालाल यादव, सचिव मण्डल सदस्य का0 प्रेमनाथ राय, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य कार्यकारिणी सदस्य का0 फूलचंद यादव ,  फारवर्ड ब्लाक के राज्य स्तरीय नेता का0 उदयनाथ सिंह एवं भाकपा माले के रमेश सिंह सेंगर शामिल थे।

जारी द्वारा-
डा. गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

डिप्टी रजिस्ट्रार ने आचार्य स्वदेश को प्रांतीय सभा प्रधान का दायित्व सौपा-शास्त्री विनोद आर्य (स्वामी रामदेव एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दी बधाई)

*वार्षिक चुनाव वार्षिक लोक निर्माण विभाग श्रमिक संघ जिला शाखा बलिया*

*31 बुलेट मोटरसाइकिलों पर कार्यवाही व तीन को किया सीज*