*केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के तत्वाधान में 26नवम्बर की राष्ट्र व्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए पन्द्रह दिनों से चल रहेअभियान के अंतिम दिन इक्वि प्लस फैक्ट्री गेट से पद यात्रा में शामिल मजदूरों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई।जिसके चलते देश में बेरोजगारी में वृद्धि हुई है*
ब्यूरो मंडल प्रभारी सुरेश कनौंजिया गोण्डा
राज्य सरकारों ने बंद पड़ी फैक्टरियां दोबारा शुरू करने के वास्ते श्रम कानूनों को शिथिल करने के लिए जो अध्यादेश पारित किए हैं उनको देखने का एक नजरिया यह भी है कि सरकारों को पता चल चुका है कि देश की अधिकांश श्रम शक्ति के लिए हालात कैसे हैं? संगठित क्षेत्र में अनुबंधित श्रमिकों को काम पर रखने वाली बड़ी फैक्टरियों को छोड़ दिया जाए तो सप्ताह में 72 घंटे का काम और बुनियादी सुरक्षा तथा कल्याणकारी मानकों की अनुपस्थिति आम बात है। ये अध्यादेश, कारोबार मालिकों को वैधानिक रूप से निरीक्षकों की निरंतर प्रताडऩा और इससे बचने की कीमत से निजात दिलाते हैं। परंतु इसके साथ ही ये इस बात को भी साफ जाहिर करते हैं कि हमारे राजनीतिक वर्ग में अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने तथा निवेश आकर्षित करने को लेकर किस कदर गलतफहमी है।
कानपुर के एक बड़े हिस्से के अधिकारों की अनदेखी करना, खासकर असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के अधिकारोंं की अनदेखी करना आसान है। चूंकि फैक्टरियों में काम करने वाले अधिकांश श्रमिक प्रवासी हैं।
पद यात्रा में शामिल पी एस बाजपेई,रामप्रकाश राय,असित कुमार सिंह,एस ए एम ज़ैदी, राणा प्रताप सिंह, क्षत्रिय आज़ाद, सुलेखा, उमेश शुक्ला,गौरव दीक्षित,दशरथ,शशि तिवारी,उमा तिवारी,प्रेमा,महावीरआदि रहे।
भवदीय
असित कुमार सिंह संयोजक केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मंच कानपुर
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