*वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामित्व योजना का किया शुभारम्भ*:-




        रिपोर्ट सुरेश कनौंजिया गोण्डा
गोण्डा मंडल के जनपद बलरामपुरआज यानी 11 अक्टूबर को तहसील उतरौला के सभागार में स्वामित्व योजना के तहत वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामित्व योजना का शुभारम्भ किया जिसकी अध्यक्षता विधायक राम प्रताप वर्मा,उपजिलाधिकारी उतरौला अरुण कुमार गौड़ व तहसीलदार उतरौला रोहित कुमार मौर्य ने संयुक्त रूप से किया। स्वामित्व योजना के तहत जमीन के मालिकाना हक का कागज देकर पहले चरण की शुरूआत किया। उतरौला तहसील के पांच ग्राम सभाओं का चयन किया गया जो क्रमशः विलासपुर, जनुकागुजर,नियामतजोत,हबीबपुर व जुनैदपुर को आज शामिल किया गया है। स्वामित्व योजना के तहत चयनित पाँच ग्रामसभाओं से 16 लोगों को स्वामित्व प्रमाण पत्र विधायक उतरौला राम प्रताप वर्मा,उपजिलाधिकारी अरुण कुमार गौड़ व तहसीलदार रोहित कुमार मौर्य के द्वारा दिया गया।तथा 70 ग्राम सभाओं का कार्य प्रारम्भ किया जा चुका है जिसको जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि ग्रामीण भारत के लिए यह बदलाव लाने वाला कदम होगा। सरकार के इस कदम से चार साल में करीब 6.62 गांवों को फायदा मिलेगा। स्वामित्व योजना प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस साल 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायत दिवस को लाया गया था। इस योजना के तहत ग्रामीण भारत में संपत्ति से जुड़े मामलों के वैध समाधान का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस योजना के जरिए ड्रोन सर्वे तकनीक की सहायता से गांव के सरकारी आबादी वाले क्षेत्रों का सीमांकन किया जाएगा। इससे गांवों में जमीन के कानूनी झगड़े कम करने में मदद मिलेगी। केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय की ओर से शुरू की गई यह एक खास योजना है। इसके बारे में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस,24 अप्रैल,2020 को घोषणा की थी। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को’रेकॉर्ड ऑफ राइट्स’देने के लिए संपत्ति कार्ड का वितरण किया जाना है। इस योजना का क्रियान्वयन 4 वर्ष में चरणबद्ध ढंग से किया जाएगा। इसे 2020 से 2024 के बीच पूरा किया जाना है। इस योजना के तहत ड्रोन सर्वे तकनीक की सहायता से गांव के आबादी वाले क्षेत्रों का सीमांकन किया जाएगा। इससे गांव में रहने वाले लोगों को अपनी संपत्ति का रिकॉर्ड्स ऑफ राइट्स हासिल होगा। इन रिकॉर्ड्स के जरिए वे अपनी संपत्ति का वित्तीय रुप में इस्तेमाल कर सकेंगे और बैंक से कर्ज या अन्य वित्तीय सुविधाएं लेने में कर सकते हैं। इस योजना से ग्रामीण योजना के लिए जमीन के सटीक आंकड़े मिलेंगे और प्रॉपर्टी टैक्स के आकलन में सरकार को मदद मिलेगी। इसके अलावा इससे जमीन से जुड़े कानूनी झगड़े कम करने में मदद मिलेगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दी गई जानकारी के मुताबिक योजना के तहत 1.32 लाख लोगों को अपनी जमीन के कागज एक एसएमएस लिंक के जरिए डाउनलोड कर सकेंगे। पहले चरण में योजना का लाभ छह राज्यों के 763 गांवों को मिलेगा। इसमें 346 गांव उत्तर प्रदेश, 221 हरियाणा,100 महाराष्ट्र,44 मध्य प्रदेश, 50 उत्तराखण्ड और 2 कर्नाटक से हैं.महाराष्ट्र के अलावा अन्य राज्यों को एक दिन के भीतर उनके जमीन के कागजात डाउनलोड करने के लिए एसएमएस लिंक एक दिन के भीतर भेज दिया जाएगा। महाराष्ट्र में प्रॉपर्टी कार्ड पर शुल्क रखा गया है, इसलिए वहां इसमें एक महीने तक का समय लग सकता है। गांव की खेती की जमीन का रिकॉर्ड खसरा-खतौनी में तो होता है। लेकिन, गांवों की आवासीय संपत्ति का मालिकाना हक के आधार पर कोई रिकॉर्ड नहीं है। इस स्कीम के जरिए यह हर आवासीय संपत्ति की पैमाइश कर मालिकाना हक सुनिश्चित किया जाएगा। इस अवसर पर राजस्व टीम से रूदल प्रसाद,तहव्वर अली व वृजलाल यादव सहित विधानसभा उतरौला क्षेत्र से पिंकू सिंह,आज्ञाराम वर्मा,सुधीर श्रीवास्तव, दद्दन मिश्रा,आनन्द त्रिपाठी,हर्षित जायसवाल, भोला वर्मा व धर्मप्रकाश चौरसिया सहित दर्जनों भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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