*बिहार में चुनाव नजदीक आ जाने से एनडीए परेशान, हैरान जनता बरगलाने के अनेक हथगंड़े अपना रही हैं*
रिपोर्ट सुरेश कनौंजिया गोण्डा
#बिहार चुनाव निकट है। एनडीए परेशान है। हैरान, परेशान, जनता को बताने- बहकाने को कुछ भी तो नहीं। एकदम खाली हाथ है एनडीए।
#ऐसे में सुशांत प्रकरण को इतना ताना गया कि अहम मुद्दा बन जाये।
#जमीन पर तो नहीं, आसमान पर तो छाया हुआ है सुशांत प्रकरण। पर उसे भुनाने वाला बालीबुडिया फेस चाहिये था। एक ऐसा चेहरा जो ख़ूबसूरत हो, आकर्षक हो, ग्लैमरस हो और सुशान्त से सहानुभति को भुना सके।
जो बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी के दंश को भुला कर जाति, प्रववासियों पर अत्याचार और नारी उत्पीड़न की आभासी पीड़ा के नाम पर जुटा सके। सो संघ को ऐसा चेहरा मिल गया। मीडिया ने उसे तराश कर संगमरमरी बना दिया।
#बाबरी मस्जिद राम मंदिर प्रकरण को भुनाने के लिए कृत्रिम राम मंदिर तैयार होगया। ढहाने वाला एक बाबरी गिरोह भी तैयार होगया। फिल्मों में निभाये गये चरित्रों के चुनींदा वीडियो सर्कुलेट होना शुरू हो गये। मुम्बई में जो घटित हो रहा है, उसमें बिहार की विपक्षी पार्टियों की कतई कोई भूमिका नहीं। पर उन पर सवाल दागे जायेंगे। उनको जिम्मेदार ठहराया जायेगा।
#कोरोना काल में खंडहर में तब्दील कर दी गई अर्थव्यवस्था, उसके कारण पैदा हुआ बेरोजगारी का महा ज्वार, आत्महत्याएं, पलायन और पुनर्पलायन, बाढ़ की तवाही, इलाज और तीमारदारी के अभाव में कोरोना पीड़ितों की मौतों, किसानों की बर्बादी और कानून व्यवस्था की बदत्तर स्थिति को कहीं गहरे दफनाने की साजिश है ये। आपात्काल से भी कई गुनी खूंख्वार तानाशाही को भुला देने की एक चतुराई से भरी कोशिश है ये।
#निर्माण मुम्बई में चल रहा है, इस्तेमाल बिहार में होगा इस बालीबुडिया रोबोट का।
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