*कौन लेगा पांच मौतों की जिम्मेदारी?*
रिपोर्ट सुरेश कनौंजिया गोण्डा
जहरीली गैस से नहीं बल्कि डूबने से हुई थी मौत। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा के बाद कटघरे में जिम्मेदार। शहर के एक कुएं में गिरे बछड़े को बचाने के दौरान पांच लोगों की मौत का मामला
*दिंनाक - 11, 2020*
इसी कुएं में उतरे पांच युवकों की हुई थी मौत
गोण्डा। शहर के मोहल्ला महाराजगंज में आठ सितंबर को कुएं में गिरे बछड़े को बचाने के दौरान हुई पांच युवकों की मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा होने के बाद अब प्रशासन, नगर पालिका और अन्य जिम्मेदार कटघरे में खड़े हो गए हैं। पीएम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कुएं में उतरे युवकों की मौत जहरीली गैस से नहीं बल्कि पानी में डूबने से हुई है।
इस खुलासे के बाद घटना के दौरान चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन तथा टीम पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कुएं में बछड़े को निकालने के लिए उतरे युवकों की मौत दम घुटने से नहीं, बल्कि डूबने से हुई है। पीएम रिपोर्ट में पेट व फेफड़ों में भी पानी भरना पाया गया है।बताते चलें कि रेस्क्यू के दौरान कुएं में गिरे युवकों को निकालने के लिए फायर ब्रिगेड द्वारा कुएं में भारी मात्रा में पानी भरा गया था। गौरतलब है कि मंगलवार को महाराजगंज मोहल्ले के ब्रह्मबाबा स्थान पर स्थित कुएं में एक बछड़ा गिर गया था, जिसे बचाने के लिए एक-एक करके पांच युवक कुएं में उतरे और अंदर ही रह गए।
आनन-फानन में पुलिस व प्रशासन को सूचना दी गई। कुछ ही देर में मौके पर पहुंची पुलिस व फायर ब्रिगेड की टीम ने रेस्क्यू आपरेशन शुरू कर दिया। रेस्क्यू के दौरान कुएं में फायर ब्रिगेड की गाड़ी से पानी भरा गया। इसके बाद फिर कुएं से पानी खाली किया गया और शवों को बाहर निकाला गया।
मोहल्ले के लोग बताते हैं कि कुएं का इस्तेमाल पिछले करीब बीस वर्षों से नहीं हो रहा था। ऐसे में कुएं का सोता सूख चुका था। सिर्फ बरसात का पानी ही कुएं में रहता था। इस बार ठीक-ठाक बरसात होने के कारण माना जाता है कि दो से ढाई फिट पानी ही कुएं में रहा होगा। ऐसी स्थिति में कुएं में डूबकर मरने की संभावना ही नहीं हो सकती। लोगों का मानना है कि रेस्क्यू के दौरान भरे गए पानी में डूबने से युवकों की मौत हो सकती है।
*फेफड़ों में पानी भर जाने से हो जाती है मौत*
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. समीर गुप्ता बताते हैं कि पानी में सांस लेने के दौरान ही फेफड़ों तक पानी पहुंचता है जिसके बाद फेफड़ों में पानी भर जाने से मौत हो जाती है।
वह बताते हैं कि गहरे कुएं में ऑक्सीजन लेवल बहुत कम हो जाता है जिससे आदमी अचेतावस्था में चला जाता है। ज्यादा देर तक अगर कुएं में ही फंसा रहे तो उसकी मौत हो सकती है।
*जवाबदेही से बच रहे आलाधिकारी*
नगर कोतवाल आलोक राव ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में युवकों के डूबकर मरने की पुष्टि की बात स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि पहले युवक जहरीली गैस के कारण अचेत हो गए और बाद में कुएं में डूबकर उनकी मौत हो गई।
वहीं इस रिपोर्ट के बाद प्रशासन तथा अन्य जिम्मेदारों ने खामोशी अख्तियार कर ली है। जिलाधिकारी डॉ नितिन बंसल जवाबदेही से बच रहे हैं और पुलिस अधीक्षक राजकरन नैय्यर भी खामोश हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर इन मौतों का जिम्मेदार कौन है?
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