*वामपंथी दलों का आह्वान-भारतीय संसद को विनष्ट करने के विरूध्द मजबूती से प्रतिरोध जताओ!क्रषि क़ानूनों के खिलाफ किसान संगठनों के 25 सितंबर के प्रतिरोध को संपूर्ण समर्थन प्रदान करो!!*
रिपोर्ट सुरेश कनौंजिया गोण्डा
भाजपा सरकार द्वारा क़ानूनों को रौंद कर देश की खेती को गिरवी रखने के लिये सभी संसदीय प्रक्रियाओं और कायदे क़ानूनों को हवा में उड़ाने की की कारगुजारियों की वामपंथी दल कड़े शब्दों में निन्दा करते हैं। संसदीय लोकतन्त्र के इस विनष्टीकरण से फासीवाद के पूर्वाभास प्रदर्शित होता है। राज्य सभा में मत विभाजन और मतदान की मांग करने वाले विपक्ष के सांसदों को निलंबित कर यदि भाजपा सोचती है कि वह विपक्ष का मुंह बंद कर देगी, तो वह ऐसा कर नहीं पायेगी। वामपंथी पार्टियां भारतीय संसद, भारत के संविधान और हमारे धर्मनिरपेक्ष लोकतान्त्रिक गणतन्त्र की रक्षा के संकल्प को दोहराती हैं। वामपंथी दल आम लोगों का आह्वान करते हैं कि वे हमारे संवैधानिक गणराज्य पर हो रहे संगीन हमलों के विरूध्द विरोध प्रकट करने को आगे आयें।
सरकार द्वारा थोपे गये ये कानून देश की खेती और हमारे किसानों को बरवाद कर देंगे। सारे क्रषि क्षेत्र को क्रषिविपणक कारपोरेट्स को हस्तांतरित करने से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली पूरी तरह खत्म हो जायेगी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली संपूर्णतः विनष्ट हो जायेगी, बेशर्म काला बाजरियों और विशालकाय कारपोरेट्स को खाद्यान्नों और खाद्य पदार्थों की जमाखोरी की छूट मिल जायेगी, जिससे वे खाद्य पदार्थों की क्रत्रिम किल्लत पैदा कर सकेंगे और कीमतों को मनमाने तरीके से बढ़ा सकेंगे। ये कानून भारत की खाद्य सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल देंगे।
वामपंथी पार्टियां देश भर की अपनी समस्त इकाइयों से अपील करती हैं कि इन क़ानूनों को वापस लेने के लिये 'अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वयन समिति' द्वारा 25 सितंबर को प्रतिरोध के आह्वान के प्रति पूर्ण समर्थन और एकजुटता प्रदर्शित करें।
वामपंथी पार्टियां अपनी सभी राज्य इकाइयों का आह्वान करती हैं कि अन्य राजनैतिक दलों से विचार विमर्श कर केन्द्र सरकार को इन क़ानूनों को वापस लेने को बाध्य करने को प्रतिरोध प्रदर्शन हेतु कार्यक्रमों का निर्धारण करें।
अननुवाद-
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
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