*भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय आवाहन पर आज 14 सितंबर को सरकार की नीतियों के विरोध में प्रोटेस्ट करके सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन दिया गया*
रिपोर्ट सुरेश कनौंजिया गोण्डा
गोण्डा कलेक्टर मे सामाजिक दूरी बनाए रखते हुए विरोध किया गया और विरोध के पश्चात महामहिम राष्ट्रपति एवं महामहिम राज्यपाल महोदय को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से दिया गया।
कार्यक्रम में पार्टी जिला सचिव कामरेड राम किशोर,कमरेड सत्यनारायण त्रिपाठी, कामरेड सुरेश कनौंजिया , कामरेड दिनेश त्रिपाठी , कामरेड गुरु प्रसाद, कामरेड शिव कुमार एवं अन्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के बाद जारी बयान में कहां गया की भारत की अर्थव्यवस्था को खंडहर में तब्दील कर देने और लोकतन्त्र को गहरे संकट में फंसा देने के विरोध में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 14 सितंबर को सारे देश में प्रतिरोध दर्ज कर रही है। ज्ञातव्य हो कि इसी दिन संसद का सत्र शुरू होने जा रहा है।
बड़े पैमाने पर बेरोजगारी पैदा करने वाली, गरीबी बढ़ाने वाली एवं जीवनयापन के साधनों को तहस नहस करने वाली मोदी सरकार की विनाशकारी आर्थिक नीतियों के विरूध्द जनता नाराज़ है और लोकतांत्रिक विरोध कर रही है।
देश की अर्थव्यवस्था के बारे में लगातार झूठे दावे करने और झूठ बोलने वाली वित्त मंत्री को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, अतएव वो पद छोडे।
भाकपा “जीवनयापन, समानता और न्याय के लिये- भारत और भारत के संविधान की रक्षा के लिये सदा प्रतिबध्द रही है और रहेगी”, इस संकल्प के साथ यह प्रतिरोध है।
बयान में कहा गया कि उत्तर प्रदेश में अपराधों की भरमार, भ्रष्टाचार और शासकीय गुंडागर्दी है जिन्हें भाकपा विगत कई माहों से लगातार उठाती रही है। महामहिम राष्ट्रपति एवं महामहिम राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन में निम्न मांगे प्रस्तुत की गई हैं।
ज्ञापन में मांग की गई कि:
1- जर्जर अर्थव्यवस्था में सुधार के लिये हर संभव कदम उठाये जायें। बड़े पैमाने पर रोजगार दिये जायें, रोजगार छीनना बन्द किया जाये। रोजगार देने में सक्षम सार्वजनिक क्षेत्र को बेचना तत्काल बन्द किया जाये। मध्यम, लघु और कुटीर उद्योगों को डूबने से बचाने को हर संभव सहायता दी जाये।
2- लोगों की क्रय शक्ति बढ़ने से ही उत्पादन का चक्र बढ़ता है। अतएव सबके खाते में छह माह तक रु॰ 10 हजार प्रति माह डाले जायें। मनरेगा का दायरा बढ़ाया जाये और शहरी मनरेगा भी शुरू की जाये।
3- कोरोना काल में क्रषी ने अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा दिया है मगर किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। उसे सुधारने के हर संभव प्रयास किये जायें। किसान विरोधी 3 अध्यादेशों को वापस लिया जाये।
4- लाक डाउन में श्रमिकों के पलायन से अर्थव्यवस्था की रीढ़ टूट गयी और श्रम तथा श्रमिकों की अपरिहार्यता सिध्द हो गयी। अतएव श्रमिक विरोधी कानून और कदम वापस लिये जायें।
5- केन्द्र सरकार निरंतर लोकतन्त्र और संविधान विरोधी कार्यों में लिप्त है, उन पर लगाम लगाई जाये।
6- उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था बेहद खराब है। सरकार पुलिस- प्रशासन को अपने राजनैतिक औज़ार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। जनता की लोकतान्त्रिक और राजनीतिक गतिविधियों को बाधित किया जा रहा है। अघोषित तानाशाही दमन का पर्याय बनी हुयी है। इस सब पर रोक लगा कर लोकतान्त्रिक बदलाव लाये जायें।
7- कोरोना से निपटने में केन्द्र और राज्य सरकारें आवश्यक भूमिका निभाने में फेल रही हैं। लोगों का जीवन और स्वास्थ्य नष्ट हो रहा है। अन्य बीमारियों ने भी पैर पसारना शुरू कर दिया है। बाढ़ ने भी तवाही मचा रखी है। लोगों के जीवन और स्वास्थ्य को बचाने को गंभीर और ठोस प्रयास किये जायें।
8- समय की मांग है कि सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत किया जाये।
9- कोरोना काल की फीस माफ की जाये। गरीब बच्चों की पढ़ाई का इंतजाम किया जाये।
आशा ही नहीं पूरा विश्वास है कि आप उपर्युक्त के संबंध में शीघ्र समुचित कार्यवाही करेंगे।
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