*एसडीएम के सामने ही खाया जहर जबरन सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराने से*



            रिपोर्ट सुरेश कनौंजिया गोण्डा
गोण्डा। एक जमीनी विवाद में राजनीतिक रसूख की दखलंदाजी ने जो पटकथा लिखी उससे पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गये। जबरन सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराने व पीड़ित पक्ष को ही पुलिस द्वारा अपने वाहन में बैठाने से क्षुब्ध युवक ने एसडीएम व सीओ के सामने ही जहर पी लिया। आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां हालत गंभीर होने के बाद लखनऊ रेफर कर दिया गया। इस मामले में पीड़ित पक्ष ने सत्तापक्ष के दबाव में प्रशासनिक अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
जिले के कोतवाली देहात क्षेत्र के बहादीपुर गांव में मंगलवार को विवादित जमीन की पैमाइश के दौरान हंगामा हो गया। उक्त गांव निवासी लालमणि सिंह का कहना है कि सोमवार की दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर सदर विधायक अपने प्रतिनिधि के साथ गांव में पहुंचे। इन लोगों ने प्रशासन के बल पर कब्जा करके सड़क पटवाए जाने की बात कही। इसकी शिकायत लेकर उसकी चाची सुशीला सिंह मंगलवार को जिला मुख्यालय पर अधिकारियों के पास गयी थीं। वह वापस घर आतीं, उससे पहले ही दोपहर करीब 12 बजे एसडीएम वीर बहादुर यादव, सीओ सदर लक्ष्मीकांत गौतम व लेखपाल विपक्षियों के साथ बिना किसी पूर्व सूचना के मौके पर पहुंच गए। आरोप है कि राजनीतिक दबाव में जबरन विवादित भूमि की पैमाइश की जाने लगी।
लालमणि के अनुसार, एक पक्षीय कार्रवाई होते देखकर जब उसके पिता हरिपाल सिंह व चाचा श्रीनरायन सिंह ने विरोध किया तो अधिकारियों ने उन्हें जबरन पुलिस वाहन में बैठा दिया। इतना ही नहीं, पैमाइश के सहमति पत्र पर जबरदस्ती हस्ताक्षर भी करा लिया। इससे आहत होकर उसके बेटे ब्रह्मादेव सिंह ने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों तथा गांव वालों के सामने ही ज़हर खा लिया। युवक द्वारा उठाए गए इस अप्रत्याशित कदम से वहां मौजूद अधिकारियों के पैरों तले से जमीन खिसक गई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने विधायक प्रतिनिधि के दबाव में एकपक्षीय कार्रवाई शुरू की थी। विधायक ने भी इस मामले में उनकी बात सुनने से साफ इंकार करते हुए सड़क पटवाए जाने की धमकी दी थी।

लालमणि सिंह का कहना है कि इस प्रकरण को विधायक प्रतिनिधि ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ रखा है। हालांकि विधायक प्रतिनिधि इन आरोपों से इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि लम्बे समय से यह विवाद चल रहा था। जानकारी होने पर अधिकारियों को न्याय संगत कार्रवाई करने के लिए कहा गया था।

इस घटना के संबंध में मंगलवार को ही कोतवाली देहात में तहरीर दी गई लेकिन समाचार लिखे जाने तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। एसडीएम सदर वीर बहादुर यादव का कहना है कि गांव की एक महिला ने मुख्यमंत्री व अन्य को शिकायती पत्र दिया था, जिसमें उसने न्याय न मिलने पर आत्महत्या की धमकी दी थी। इस पर मंगलवार को मौके पर पहुंचकर पैमाइश की प्रक्रिया शुरू की गई। उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष राजी थे लेकिन इसी बीच युवक ने ज़हर खा लिया। वहीं सीओ लक्ष्मीकांत गौतम का कहना है कि वृद्ध को वाहन में बैठाने की बात निराधार

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