*डीएम सर ! बेबश आंखों से अपनी बर्बादी का तमाशा कब तक देखते रहेंगे किसान* !





         रिपोर्ट सुरेश कनौंजिया गोण्डा
गोण्डा- आंखों में अश्कों का सैलाब, दिल मे दर्द की टीस लिए जब राम बहादुर, शिव बहादुर व केसरी अपने मक्के के खेत को जलमग्न मे सराबोर हुए देखते हैं तो एक ही आवाज जेहन से निकलती है कि भगवान किस जुल्म की ये सजा है जो हमे बर्बाद करने मे तुली है। आखिर वो सुबह कब आएगी जब इस मुसीबत से हमे निजात मिलेगा और हमारे खेतों की लहलहाती फसलें हमें खुशी से झूमने के लिए विवश कर देगी।








तकदीर का फसाना जाकर किसे सुनाएं, इस दिल मे जल रही है अरमानों की चिंताएं दर्द से लवरेज ये पंक्तियां किसी फिल्म की पटकथा नही बल्कि विकास खंड तरबगंज के ग्राम सभा रानी पुर स्थित छिटिक पुरवा के लोगों की वास्तविक दास्तान है। बताते चलें कि यहां के निवासी शिव बहादुर के साथ ही राम बहादुर, रामलखन,राम उजागर, लाल बहादुर व केसरी लघु सीमांत किसान हैं। जिनका मुख्य उद्देश्य खेती करके परिवार का पालन पोषण करना है। बताते चलें कि उक्त गांव में इनके साथ ही अनेकों किसानो के सैंकड़ों खेत हैं जिसमे मक्के की फसल लगाई गई थी। जो भारी बारिश के चलते पानी मे डूब रही हैं। शिव बहादुर ने अपने दर्द की दास्तान को कुछ इस तरह से बयां किया है उन्होंने डब डबाई आंखों से कहा कि साहब बरसात के पानी ने हमारे मेहनत पर भी पानी फेर दिया है। हम तो बर्बाद हो चुके हैं। बताते चलें कि अधिशाषी अभियंता पीडब्लूडी के साथ ही डीएम को प्रार्थना पत्र देकर पीड़ित किसान ने यह अवगत कराया है कि पिछले वर्ष यहां पीडब्लूडी विभाग द्वारा सड़क का निर्माण कार्य हुआ था, जहां जल निकासी हेतु कोई पाइप वाली पुलिया का निर्माण नही कराया गया। जिसके चलते उनके मक्के के खेत ने तलैया का रूप ले लिया है। पीड़ित किसानों ने खेतों की जल निकासी हेतु 600 एमएम की ह्यूम पाइप वाली पुलिया के निर्माण की मांग की है ताकि उनकी फसल बच सके नही तो ये किसान बर्बाद होकर खुद की किस्मत पर आंसू बहाते रहेंगे।   

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