*एल्गिन चरसडी बांध बनने के बाद पहली बार आए पानी के इतने बड़े सैलाब से ग्रामीण भयभीत घाघरा खतरे के निशान से 100 सेटीमीटर से ऊपर**घाघरा नदी के पानी का फैलाव एक किलोमीटर से बढकर पहुंचा ढाई किलोमीटर से ऊपर उसके बाद भी पानी का दबाव बाँध एवं गावों में जारी**प्रशासन द्वारा बनायी गयी बाढ चौकियों का काम केवल अधिकारियों के सूचना तक सीमित बाढ में फसे लोगों का कोई सहयोग नही**ग्राम नकहरा के एक दर्जन मजरे पानी से पूरी तरह डूबे*




       रिपोर्ट सुरेश कनौंजिया गोण्डा
करनैलगंज,गोण्डा । घाघरा में बाढ़ की लगातार बिकराल होती जा रही है। सरयू नदी खतरे के निशान से 100 सेंटीमीटर से भी ऊपर पहुंच गई है। एक सप्ताह से लगातार छोड़े जा रहे पानी से नदी पूरे शबाब पर है। शुक्रवार को विभिन्न बैराजों से छोड़े गए करीब साढे तीन लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज शनिवार को जारी रहा।रविवार को भी बांध के आस पास वाले गांव में बाढ़ के पानी का फैलाव तेजी से हो रहा है। आधा गांव बाढ़ के पानी से बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं। जिसमें ग्राम माझा रायपुर, परसावल, नेपुरा, पारा, बेहटा और कमियार यह बाराबंकी और गोंडा जिले की सीमा पर बसे गांव हैं तथा करनैलगंज तहसील के ग्राम नकहरा के नौ मजरे पूरी तरह बाढ़ के पानी से डूब चुके हैं और सभी मजरे अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। एल्गिन चरसडी बांध बनने के बाद पहली बार आए पानी के इतने बड़े सैलाब से ग्रामीण भयभीत हैं। ग्रामीणों के मुताबिक पहली बार घाघरा नदी में इतना पानी आ रहा है। इसके पूर्व घाघरा नदी का फैलाव मात्र एक किलोमीटर की परिधि में था। जो अब बढ़कर करीब ढाई किलो मीटर से भी ज्यादा हो गया है। जिससे पानी का दबाव बांध एवं आसपास के गांव में कम होना चाहिए, मगर पानी का जबरदस्त सैलाब आने से घाघरा नदी 100 सेंटीमीटर से अधिक ऊपर पहुंच चुकी है और जिन गांवों में आज तक पानी नहीं घुसा वहां तक घाघरा के बाढ़ का पानी दस्तक दे चुका है।
करनैलगंज तहसील के ग्राम नकहरा के 1 दर्जन मजरे पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। जहां की स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है और ग्रामीण परेशान हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों के सुख सुविधा के लिए बाढ़ चौकी की स्थापना कर दी है। जहां राजस्व के अधिकारी और कर्मचारी कैम्प कर रहे हैं और पल-पल की सूचना अधिकारियों को दे रहे हैं। मगर ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। शुक्रवार को 4 लाख 11 हजार क्यूसेक पानी और शनिवार को 3 लाख 40 हजार क्यूसेक पानी तथा रविवार को 3 लाख 20 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज सरयू में हो रहा था। नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष 107.156 पर चल रही थी। अगर बरसात ना हुई तो पानी घटने के आसार हैं मगर पहाड़ी क्षेत्र और बहराइच, लखीमपुर, सीतापुर, नेपाल के सरहदी इलाकों में बारिश होने से नदी के जल स्तर में इजाफा होने का प्रबल अनुमान लगाया जा रहा है। 
बाढ़ से प्रभावित ग्रामीणों को प्रशासन की तरफ से शरण स्थल पर छाजन के लिए पॉलीथिन की व्यवस्था कराई गई। बाढ़ राहत केंद्र पर मौजूद लोगों को पॉलीथिन का वितरण राजस्व कर्मचारियों द्वारा किया गया। रविवार को अपर जिलाधिकारी गोंडा, उप जिलाधिकारी करनैलगंज, तहसीलदार करनैलगंज की संयुक्त टीम ने बांध एवं बांध के आस-पास के गांव का नाव से निरीक्षण किया और बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों से लगातार निगरानी करने के साथ-साथ गांव में फंसे ग्रामीणों को निकाल कर सुरक्षित स्थान पर लाने के निर्देश दिए हैं।

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