अपराधी राजनैतिक संरक्षण में ही करते हैं बड़ा अपराध पत्रकारों पर आरोप लगना घटिया मानसिकता पेजा

          रिपोर्ट सुरेश कनौंजिया गोण्डा
 लखनऊ जुलाई उत्तर प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन  के राष्ट्रीय अध्यक्ष गिरीश चंद कुशवाहा ने प्रदेश में पुलिस के  लोग मारे जाने की कोई नई बात नहीं बताते हुए कहा इसके पूर्व बसपा शासन में चित्रकूट  और सपा शासन में मथुरा के जवाहर बाग  कांड भी इसी तरीके की घटना है कानपुर में जो जवानों की हत्या हुई या मथुरा या चित्रकूट में जो हत्या हुई इस तरीके की हत्याएं राजनीतिक संरक्षण में ही होती है क्योंकि हत्यारों की कोई जाति नहीं होती है ना ही उनका कोई धर्म होता है वह अपने को संरक्षण पाने के लिए सत्ता पक्ष के असरदार नेताओं के यहां शरण लेते हैं और उन्हें इसके बदले मे उन्हें लाभान्वित करते हैं यदि वास्तव में केंद्र सरकार उपरोक्त घटनाओं की सीबी आई जांच करा दें तो बड़े से बड़ा राजनेता के गर्दन तक आसानी से जांच कमेटी पहुंच सकती है और अपराधियों को संरक्षण देने वालों को भी वही  सबक मिलना चाहिए जो अपराध करते हैं उनको  मिलती है उत्तर प्रदेश सरकार को चाहिए कि विकास दुबे को उनकी सरकार का कौन मंत्री सांसद विधायक संरक्षण दे रहा था इसकी निष्पक्ष विवेचना विकास दुबे के सारे मोबाइल नंबर कलेक्ट कर के अगर निष्पक्ष विवेचना करा दी जाए तो वर्तमान एवं भूतपूर्व के कई राजनेता के  गर्दन  मैं फांसी का फंदा आसानी से न्यायालय लटका सकती है 
 विपक्ष हो या सत्ता पक्ष इनकी आदत हो गई है मीडिया को निशाना बनाने की संरक्षण स्वयं खाकी देता है और बदनाम मीडिया को किया जाता है आजकल झोलाछाप नेता कानपुर कांड को लेकर मीडिया पर आरोप लगा रहे हैं कि मीडिया सत्तापक्ष की  गुलाम  हो चुकी है परंतु वह लोग यह नहीं जानते जब उनकी सरकार में इस तरीके की घटनाएं हुई थी तब यही बात वर्तमान समय कि सरकार के लोग कहते थे राजनीतिक व्यक्तियों को यह सोच लेना चाहिए अपराध  करने वालों को मीडिया नहीं राजनेता संरक्षण देता है इसलिए राजनेताओं को मीडिया पर उंगली उठाने के पहले अपने गिरेबान में झांक कर देख लेना चाहिए कहीं मीडिया ने उनकी बात उजागर  कर दी तो उनकी गर्दन में फांसी का फंदा लटकने से इनकार नहीं किया जा सकता है
नेशनल प्रेसिडेंट गिरीश चंद कुशवाहा ने चित्रकूट मथुरा के बाद कानपुर में पुलिस के जवानों की शहादत को नमन करते हुए कहा सरकार अपराधियों को ऐसा कड़ा जवाब दें कि भविष्य में हमारे पुलिस के जवान हमारी सेना के जवान की शहादत बेकार ना जाए और राजनेताओं की  गर्दन फंसे अगर वह वास्तव में अफसर शहीद पुलिस जवानों के हमदर्द हैं चाहे उनकी नौकरी जाए याद रहे पर ऐसे लोगों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने का काम अवश्य किया जाना चाहिए एसोसिएशन पुलिस विभाग के  आला अधिकारियों के साथ है

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

डिप्टी रजिस्ट्रार ने आचार्य स्वदेश को प्रांतीय सभा प्रधान का दायित्व सौपा-शास्त्री विनोद आर्य (स्वामी रामदेव एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दी बधाई)

*वार्षिक चुनाव वार्षिक लोक निर्माण विभाग श्रमिक संघ जिला शाखा बलिया*

*31 बुलेट मोटरसाइकिलों पर कार्यवाही व तीन को किया सीज*