*बिजली कटौती से उद्योग, खेती और आम जनजीवन तवाह* *सप्ताह के भीतर सुधार करो नहीं तो होगा आंदोलन: भाकपा*
रिपोर्ट सुरेश कनौंजिया गोण्डा
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने कहा कि लखनऊ, वाराणसी आदि कुछ स्थानों को छोड़ कर समूचे उत्तर प्रदेश में अभूतपूर्व बिजली कटौती जारी है। इससे भीषण गर्मी में आम नागरिकों को अकल्पनीय परेशानियां तो हो ही रहीं हैं, खेती और उद्योग को भी भारी हानि होरही है।
बिजली का बार बार आना जाना, कम देर को आना और ज्यादा देर को जाना, अंधाधुंध ट्रिपिंग, लो बोल्टेज, ट्रांसफारमर्स एवं लाइनों में फाल्ट आदि सब हद के बाहर होरहे हैं। जर्जर विद्युत लाइनों और पुराने गिरासू पोल्स का न बदला जाना जान लेवा मसला बन गया है।
एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आगरा, अलीगढ़ एवं अन्य कई मंडलों में आज तक तो सूखे जैसी स्थिति है। इससे धान की रोपाई और अन्य क्रषिकार्य प्रभावित होरहे हैं। राज्य सरकार तो शायद सूखे की इस स्थिति से अनभिज्ञ बनी हुयी है। नहीं तो अब तक यह क्षेत्र सूखा प्रभावित घोषित होजाना चाहिये था।
उन्होने कहाकि बिजली कटौती का उद्योगों पर भारी प्रभाव पड़ रहा है। कोरोना/ लाक डाउन से उद्योगजगत पहले बहुत प्रभावित हुआ है, अब अंधाधुंध विद्युत कटौती के चलते संभल नहीं पा रहा है। उन्होने सवाल किया कि क्या हम ऐसे ही भारत को आत्मनिर्भर बनायेंगे? क्या इसी तरह चीन को मात देंगे और विश्व गुरु बन जायेंगे?
जहां तक नागरिकों की बात है भीषण गर्मी और उमस से उनका बुरा हाल है। वैसे तो सभी परेशान हैं पर बुजुर्ग, बीमार और बच्चे तो गर्मी से हाल- बेहाल हैं। कोरोना से जूझने को लोगों को मजबूत इम्युनिटी की जरूरत बतायी जा रही है। पर जो बिजली कटौती के चलते रात भर जागेगा वो क्या खाक इम्यूनिटी बना पायेगा?
डा॰ गिरीश ने कहा कि या तो सरकार और विद्युत विभाग ने हथियार डाल दिये हैं या फिर विभाग के निजीकरण के उद्देश्य से व्यवस्थायें भंग की जारही हैं। उन्होने चेतावनी दी कि यदि इस समस्या पर एक सप्ताह के भीतर काबू न पाया गया तो भाकपा और उसके सहयोगी संगठन सड़कों पर उतारने को बाध्य होंगे।
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