*गोंडा में एक नर्सिंग होम के स्टाफ को Corona Positive Case पाए जाने पर Sanitization के लिए Hospital को 48 घंटे के सील किया गया है*


           रिपोर्ट सुरेश कनौंजिया गोण्डा
Hospital में पहले से ही OPD बंद चल रही थी और केवल प्रसव के लिए Hospital में Pregnants का admission किया जा रहा था ।
सूत्र बताते हैं कि सिटी में मेडिकल से जुड़े 90 लोगों की जांच के लिए सैंपल भेज गया था और जिस hospital को sanetization के लिए 48 घंटे के लिए सील किया गया है उसके 2 doctors ने खुद अपना sample दिया था और किसी भी hospital ने न ही अपना सैंपल दिया और न ही ऐसे स्टाफ का सैंपल दिया जो Patient के डायरेक्ट Contact में रहते हैं ।
सवाल यह भी सामने आ रहा है कि जिस 50 प्रतिशत स्टाफ से काम कराकर उन्हें 14 दिन qurantine कराकर अगले फिर 14 दिन दूसरे स्टाफ से काम करने का दावा किया जा रहा है क्या ऐसी कोई list किसी के पास है ।
फिलहाल गोंडा में 
कोरोना संक्रमण के नए मामले अनलॉक वन में बढ़ रहे हैं। कई जगहों को चिन्हित कर कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जिला प्रशासन मुस्तैदी से काम कर रहा है।
सतर्कता के बावजूद भी संक्रमण रुक नहीं रहा है। इस बीच गोण्डा मुख्यालय के नामी हॉस्पिटल में मंगलवार को हड़कंप मच गया जब यहां पर एक नर्स कोविड-19 पॉजिटिव पाई गई। जाँच में पुष्टि होने के बाद लेवल वन में नर्स को शिफ्ट किया गया। इसके बाद सुबह बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट वंदना दिर्वेदी ने निजी अस्पताल को सील करा दिया और अस्पताल सील कर कांटैक्ट ट्रेसिंग करवाया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार नर्स अस्पताल के फ्लोर पर ही एक कमरे में रहती है। अस्पताल में रहकर ड्यूटी करती थी। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि अस्पताल प्रशासन को सैनिटाईजेशन और एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं। केवल भर्ती मरीजों का ही इलाज होगा। अस्पताल के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई है। वहीं अस्पताल प्रशासन ने बताया कि नर्स पांच दिन पहले से ही आइसोलेट थी।


दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर यह पत्र सीएमओ को लिखा गया है जिस पर कई सवाल उठाए गए हैं ।


*मुख्य चिकित्साधिकारी गोण्डा*
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गोण्डा में संचालित नर्सिंग होम में कितने मेन डॉक्टर्स व नर्सिग स्टॉफ की कोरोना जांच हुई है। सुना है जाँच तो कराया है परंतु फ्रंट लाइनर डॉक्टर्स, स्टॉफ की नही , प्रत्येक वर्किंग नर्सिंग होम से 10 की जांच तो हुई लेकिन किनकी , यह भी देखने योग्य है।
यदि फ्रंट लाइनर की नही हुई है तो गलत है। कुछ जिम्मेदारी का निर्वहन करें।
न जानकारी में कोरोना संक्रमित व्यक्ति यदि अस्पताल, नर्सिंग होम में आता है और डायरेक्ट डॉक्टर्स , नर्सिंग स्टाफ के संपर्क में असावधानी वश आ जाता है तो इसमें किसी भी प्रकार का दोष मेडिकल स्टाफ का नही है। लेकिन फ्रंट लाइनर को संदेह होने पर अपनी जांच जरूर करानी चाहिये। 
पुनः CMO मैम से आग्रह है जिम्मेदारी का निर्वहन करें। आपकी सजगता से गोण्डा को कोरोना से बचाया जा सकता है। 
कोरोना संक्रमित मरीज एवं फ्रंट लाइनर कोरोना वॉरियर्स से संवेदना रखें।

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