*ब्यूरो चीफ सुरेश कनौंजिया गोण्डा**क्या आपको *पत्रकार* की जरूरत नहीं पड़ती???*आम जनता से कुछ सवाल ?*
रिपोर्ट सुरेश कनौंजिया गोण्डा
1. जब किसी दबंग द्वारा आपका हनन किया जाता है तब क्या आपको एक पत्रकार की जरूरत नहीं पड़ती ?
2. जब प्रशासन के किसी कर्मचारी द्वारा आप परेशान किये जाते हैं तब क्या आपको एक पत्रकार की जरूरत नहीं पड़ती ?
3. जब आप अपनी बात प्रशासन तक पहुंचना चाहते हैं तब क्या आपको एक पत्रकार की जरूरत नहीं पड़ती ?
4. जब कोई लेखपाल, कोटेदार, प्रधान या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा आपका हक छीनने की कोशिश की जाती है तब क्या आपको एक पत्रकार की जरूरत नहीं पड़ती ?
5. जब आप किसी राजनेता, अधिकारी के साथ किसी विशेष कार्यक्रम को करते हैं तब क्या आपको एक पत्रकार की जरूरत नहीं पड़ती ?
6. जब आपको समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर भगाने की चिंता होती है तब क्या आपको एक पत्रकार की जरूरत नहीं पड़ती ?
7. जब आप अपने बच्चे को स्कूल भेजते हैं और वहां उसे अध्यापक या किसी अन्य बच्चे द्वारा मानसिक यातनाएं दी जाती हैं तब क्या आपको एक पत्रकार की जरूरत नहीं पड़ती ?
8. जब आप खेती करते हैं तो किसी कारणवश आपकी फसल का नुकसान हो जाता है तब आपको अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने के लिए क्या आपको एक पत्रकार की जरूरत नहीं पड़ती ?
9. जब आपको घर बैठे बैठे पूरे विश्व में क्या हो रहा है ये जानने के लिए एक पत्रकार की जरूरत नहीं पड़ती ?
10. जब आपको किसी भी सरकारी योजना का फायदा नहीं मिल पाता तब आपको अपने बात रखने के लिए एक पत्रकार की जरूरत नहीं पड़ती ?
_इन सवालों के जबाब स्वयं को दीजिये और फिर पत्रकारों के विषय में कुछ उल्टा सीधा कहने के बारे में सोचिए । हम ये नहीं कहते कि हम अच्छे हैं लेकिन सब के सब गलत नहीं होते । एक बिना सेलरी पर काम करने वाला व्यक्ति आपको पूरा दिन और कभी कभी तो पूरी रात जागकर, कभी धूप तो कभी बरसात में अपनी बाईक चलाकर दुनियाँ की खबरों से रूबरू कराता है तो उसका थोड़ा सा सम्मान तो होना चाहिए ।_😊
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