*बुर्के में सेनिटेशन करती मुस्लिम महिला के सम्मान पर भड़के भाजपा नेता, बताया योगी सरकार की प्रतिष्ठा पर ठेस पहुंचाने वाला*
बुर्के में सेनिटेशन करती मुस्लिम महिला के सम्मान पर भड़के भाजपा नेता, बताया योगी सरकार की प्रतिष्ठा पर ठेस पहुंचाने वा
गोण्डा
र्के में सेनिटेशन करती उज़्मा परवीन भाजपा नेता ने कहा समाजसेवा के नाम पर सरकारी अधिकारियों ने उस महिला को सम्मानित किया है, जो CAA की रही है मुख़र विरोधी, इससे पहुंची है योगी सरकार की प्रतिष्ठा को ठेस... असद रिज़वी की रिपोर्ट जनज्वार, लखनऊ। बुर्क़ा पहन कर स्वच्छीकरण (सेनिटेशन) करने वाली महिला को सम्मान मिलने पर भाजपा नेता दिलीप श्रीवास्तव ने आपत्ति जतायी है। दिलीप श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) का विरोध करने वाली उज़्मा परवीन को सम्मान देने वाले सरकारी अधिकारियों की शिकायत की है। लखनऊ के घंटाघर पर सीएए के विरुद्ध प्रदर्शन में मुख्य भूमिका निभाने वाली महिलाओं में से एक उज़्मा परवीन कोविड-19 महामारी के दौरान राशन बांटने और स्वच्छीकरण का काम कर रही हैं। लॉकडाउन में उनको इस काम को जारी रखने के लिए ज़िला मजिस्ट्रेट के कार्यालय से विशेष पास भी दिया गया है। Also Read - जिस बिहार में 72 हजार LED लगाकर भाजपा ने ठोकी चुनावी ताल, वहीं के मर रहे मजदूरों के लिए नहीं था 72 बसों का किराया बुर्क़ा पहन कर उज़्मा परवीन अपने इलाक़े के मंदिरों, रेलवे स्टेशन से लेकर मलिन बस्तियों तक स्वच्छीकरण करती हैं। इसके अलावा उनके द्वारा प्रवासी मज़दूरों आदि को राशन किट आदि भी बांटा गया था। उज़्मा परवीन का कहना कि उन्होंने स्वच्छीकरण के मशीन आदि ख़रीदने में उन्होंने अपने पास से क़रीब 95 हजार रुपए भी खर्च किये हैं। उनकी समाजसेवा को देखते हुए कई ग़ैर सरकारी संस्थाओं ने भी उनको सम्मानित किया और प्रशंसा प्रमाणपत्र भी दिए। इसकी क्रम ने लखनऊ नगर निगम ने भी उनको सम्मानित किया। उज़्मा परवीन ने बताया कि नगर आयुक्त द्वारा उनको सम्मानस्वरूप 28 मई को एक प्रशंसा प्रमाणपत्र के साथ सुरक्षा किट और सेनिटेशन किट दी गई। उन्होंने बताया कि इनाम राशि के तौर पर उनके खाते में 11 हज़ार रुपए भी नगर निगम द्वारा भेजे गए। Also Read - हर भूखे को अनाज देने का दावा करने वाली मोदी सरकार 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों में से सिर्फ 20 लाख को दे पाई है राशन उज़्मा परवीन को मिले कोरोना कर्मयोद्धा पुरस्कार पर भाजपा नेता ने पत्र लिखकर जताई है आपत्ति उज़्मा परवीन के सम्मानित होने की ख़बर प्रकाश में आने के बाद भाजपा ने दिलीप श्रीवास्तव ने इसका विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने 30 मई मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर कहा कि समाजसेवा के नाम पर सरकारी अधिकारियों ने उस महिला को सम्मानित किया है, जो सीएए की मुख़र विरोधी है। उसने सीएए के विरूद्ध प्रदर्शन के दौरान मोदी और योगी सरकारों के विरुद्ध बयान भी दिए और आवाम को गुमराह किया था। Also Read - सवर्ण लड़की से प्रेम करने वाले दलित युवक को रॉड और पत्थरों से मारने के बाद टैंपों से कुचल डाला दिलीप श्रीवास्तव जो भाजपा के प्रवक्ता के साथ मैथिलीशरण वार्ड के पार्षद भी हैं, के पत्र पर उज़्मा परवीन ने जनज्वार को बताया कि वह नगर निगम द्वारा दिए गए सम्मान को वापिस करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा वह नहीं चाहती हैं कि उनकी वजह से किसी अधिकारी की नौकरी पर आँच आये। उज़्मा परवीन ने कहा कि उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को सूचित कर दिया है कि वह सम्मान वापिस करना चाहती है। हालाँकि अभी तक वहाँ से उज़्मा परवीन के सम्मान को लेकर कोई बयान जारी नहीं किया गया है। Also Read - एम्स में नर्सों का प्रदर्शन, पीपीई किट से हो रहे इंफेक्शन, ड्यूटी के घंटे कम करने की मांग जनज्वार से हुई बातचीत में दिलीप भाजपा नेता दिलीप श्रीवास्तव कहते हैं कि उज़्मा को सम्मान महापौर की उपस्थिति में देना चाहिए था, क्योंकि वह जनता द्वारा चुनी गई हैं।वैसे भी उज़्मा परवीन ने जनता को सीएए के विरुद्ध आंदोलन में गुमराह किया है, इसलिए वे इस सम्मान की हकदार नहीं हैं। वहीं जब जनज्वार से उज़्मा को मिले सम्मान के बारे में बात करने की कोशिश की गयी तो नगर आयुक्त ने बात करने से इंकार कर दिया। वहीं उज़्मा कहती हैं, आज भी सीएए की विरोधी है। उन्होंने संविधान में मिले अधिकार के तहत सीएए विरोध किया, जो अपराध नहीं है। मुझे कुछ मुक़ामों में अदालत से राहत मिल गई और कुछ में मिलना बाक़ी है। उनके अनुसार लॉकडाउन में भी उनके घर पुलिस गई थी, लेकिन वह उस समय घर में नहीं थी। उल्लेखनीय है कि उज़्मा परवीन लखनऊ में सीएए के विरुद्ध महिलाओं के प्रदर्शन में काफ़ी सक्रिय थी। वह अपने एक साल के बच्चे के साथ प्रदर्शन में आती थीं और महिलाएँ उन्हें झाँसी की रानी कहकर बुलाती थी। प्रदर्शन के दौरान उन पर कई मुक़दमे भी लिखे गए। इसके अलावा उन्होंने बताया की CAA के प्रदर्शन के दौरान उनके पति को जेल भी जाना पड़ा था।
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